21 साल पुराने दंपती हत्याकांड में अनुपम दुबे को 14 दिन का रिमांड, मथुरा जेल से बी-वारंट पर मैनपुरी कोर्ट में पेशी

21 साल पुराने दंपती हत्याकांड में अनुपम दुबे को 14 दिन का रिमांड, मथुरा जेल से बी-वारंट पर मैनपुरी कोर्ट में पेशी

संवाददाता  पंकज मिश्रा

मैनपुरी। बेवर थाना क्षेत्र के नवीगंज में वर्ष 2005 में हुए बहुचर्चित दंपती हत्याकांड के मामले में नामजद अभियुक्त डॉ. अनुपम दुबे को सोमवार, 17 अगस्त 2026 को मथुरा जेल से बी-वारंट पर मैनपुरी न्यायालय में पेश किया गया। मामले में सुनवाई के बाद न्यायालय ने अभियुक्त का 14 दिवस का रिमांड स्वीकृत कर दिया।
मैनपुरी पुलिस के अनुसार मामला मु0अ0सं0 504/2005 से संबंधित है। इसमें भारतीय दंड संहिता की धारा 302, 307, 147, 148, 149 तथा 7 सीएलए एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था। पुलिस द्वारा मामले में धारा 173(8) सीआरपीसी के तहत आगे की विवेचना की जा रही है।
करीब 11 बजे कोर्ट में हुई पेशी
अभियुक्त अनुपम दुबे को करीब 11 बजे न्यायालय के समक्ष पेश किया गया। अभियुक्त की ओर से अधिवक्ता दीपक चंचल दीक्षित और अजय कृष्ण पांडे ने अपना पक्ष रखा। वहीं अभियोजन पक्ष ने रिमांड के समर्थन में न्यायालय के समक्ष अपना विधिक पक्ष प्रस्तुत किया।
न्यायालय ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अभियोजन पक्ष के अनुरूप आदेश पारित करते हुए अनुपम दुबे का 14 दिन का रिमांड मंजूर कर दिया।
पेशी के दौरान अनुपम दुबे ने लगाए गंभीर आरोप
कोर्ट में पेशी के दौरान अभियुक्त अनुपम दुबे ने खुद पर लगाए गए आरोपों को षड्यंत्र का हिस्सा बताया और स्वयं को फंसाए जाने का आरोप लगाया। उसने मामले में सत्ता से जुड़े कुछ प्रभावशाली लोगों के साथ-साथ न्यायिक व्यवस्था से जुड़े कुछ लोगों की भूमिका होने का भी आरोप लगाया।
हालांकि, ये आरोप अभियुक्त की ओर से लगाए गए हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और न्यायालय द्वारा इन्हें सही ठहराए जाने की कोई जानकारी सामने नहीं आई है।
6 अगस्त 2005 को हुई थी पति-पत्नी की हत्या
मामला 6 अगस्त 2005 का है। नवीगंज कस्बे में कौशल किशोर दुबे और उनकी पत्नी कृष्णा दुबे की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में अनुपम दुबे समेत छह लोगों को नामजद किया गया था।
प्रारंभिक विवेचना के बाद पुलिस ने न्यायालय में अंतिम रिपोर्ट (Final Report) प्रस्तुत की थी। उपलब्ध न्यायिक रिकॉर्ड के अनुसार वर्ष 2006 में इस रिपोर्ट को स्वीकार कर पत्रावली दाखिल दफ्तर कर दी गई थी।
इसके बाद शिकायतकर्ता पक्ष की ओर से मामले में पुनर्विवेचना की मांग की गई। वर्ष 2026 में इलाहाबाद हाईकोर्ट के समक्ष पुनर्विवेचना रोकने की मांग को लेकर दाखिल याचिका खारिज होने के बाद पुलिस की आगे की विवेचना जारी रही।
नए साक्ष्यों और तथ्यों की जांच कर रही पुलिस
पुराने मामले में अंतिम रिपोर्ट स्वीकार हो जाने के बावजूद यदि वैधानिक प्रक्रिया और न्यायिक अनुमति के तहत आगे की विवेचना जारी है, तो पुलिस नए साक्ष्यों और सामने आए तथ्यों की जांच कर सकती है। इसी क्रम में अभियुक्त को बी-वारंट के जरिए न्यायालय के समक्ष पेश किया गया और रिमांड/न्यायिक अभिरक्षा से संबंधित आदेश पारित हुआ।
हालांकि, किसी अभियुक्त का रिमांड या न्यायिक अभिरक्षा में जाना दोषसिद्धि नहीं माना जाता। मामले में अंतिम रूप से दोषी या निर्दोष होने का फैसला सक्षम न्यायालय द्वारा उपलब्ध साक्ष्यों और कानून के आधार पर किया जाएगा।

और पढ़ें

Cricket Live Score

Corona Virus

Rashifal

और पढ़ें