झाड़ियों की भेंट चढ़ती सुरक्षा: ऊँचाहार-अकोढ़ियाँ मार्ग पर जंगली बबूलों के कारण मंडरा रहा हादसों का खतरा

झाड़ियों की भेंट चढ़ती सुरक्षा: ऊँचाहार-अकोढ़ियाँ मार्ग पर जंगली बबूलों के कारण मंडरा रहा हादसों का खतरा
संवाददाता धीरेंद्र कुमार ​ऊँचाहार। ऊँचाहार क्षेत्र के अलीगंज से अकोढ़ियाँ जाने वाली सड़क इन दिनों राहगीरों और स्कूली बच्चों के लिए खतरे का पर्याय बनी हुई है। सड़क खालिकपुर खुर्द ग्राम सभा के मलकाना गाँव की दोनों पटरियों पर उगे जंगली बबूल के कटीले पेड़-पौधे आए दिन हादस बीती 22 अक्टूबर 2026 को लॉर्ड बुद्ध स्कूल का छात्र ‘लक्ष्य’ पढ़ाई के बाद साइकिल से अपने घर लौट रहा था। इसी दौरान सामने से एक वाहन आ जाने के कारण सड़क पर जगह न होने से बालक अपना संतुलन खो बैठा और सड़क किनारे कटीली झाड़ियों में जा गिरा। गनीमत यह रही कि स्थानीय लोगों ने तत्परता दिखाते हुए बच्चे और उसकी साइकिल को सुरक्षित बाहर निकाल लिया, जिससे वह गंभीर चोट से बच गया।
​स्थानीय निवासियों का कहना है कि यह सिंगल (एकल) सड़क बेहद संकरी है। जब भी कोई कार या बड़ा वाहन गुजरता है, तो साइकिल सवार बच्चों और राहगीरों के पास पटरियों पर उतरने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता। लेकिन पटरियों पर उगे बबूल के जहरीले कांटों की वजह से बच्चे अक्सर गिरकर चोटिल हो रहे हैं।
​क्षेत्रीय लोगों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि क्या प्रशासन और जिम्मेदार अधिकारी किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहे हैं?

ग्राम प्रधान का रवैया और गैर-जिम्मेदाराना बयान
​इससे पहले भी इस समस्या से संबंधित खबर प्रमुखता से प्रकाशित की गई थी, तब प्रधान ने आश्वासन दिया था कि काम शुरू होते ही सफाई करा दी जाएगी। लेकिन धरातल पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।
​जब इस संबंध में खालिकपुर खुर्द के ग्राम प्रधान रामफेर से बात की गई, तो उनका चौंकाने वाला बयान सामने आया। उन्होंने कहा, “हमारी ग्राम सभा में फिलहाल नरेगा का काम बंद है, ऐसे में क्या सफाई अपने जेब से कराएं?” हालांकि, बाद में मामला बढ़ता देख उन्होंने झाड़ियों की स्थिति दिखवाने की बात कही है।
​अब देखना यह होगा कि प्रशासन कब नींद से जागता है और मासूम बच्चों की सुरक्षा के लिए पटरियों की सफाई कब कराई जाती है।

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