‘लोकतंत्र और पत्रकारिता की चुनौतियां’ संगोष्ठी में बोले वक्ता
संकट भारी है, निदान के लिए नैतिकता – जज्बा दोनों ही जरूरी
उ.प्र. प्रयागराज। ‘लोकतंत्र और पत्रकारिता की चुनौतियां’ विषयक संगोष्ठी में पत्रकार, पत्रकारिता और लोकतंत्र की मौजूदा दशा पर विस्तार से चर्चा की गई। कहा गया कि नैतिकता ईमानदारी के साथ कार्य करने की जरूरत है। वक्ताओं ने कहा कि गलत की सहज रूप में स्वीकार्यता और बढ़ावा देने की बढ़ती परम्परा को हर हाल में रोकना होगा। इससे परिणाम और लोकतंत्र शानदार हो जाएगा। ऐसा हो जाने पर पत्रकार और पत्रकारिता की दशा – दिशा ठीक हो जाने पर लोकतंत्र खुद ही शानदार हो जाएगा।
बुधवार को राधा देवी बालिका इंटरमीडिएट कॉलेज अक्षयचंद्रपुर बेरावां में पत्रकार मिलन समारोह का आयोजन किया गया। इस दौरान कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए। मुख्य वक्ता आईएएस अनुभव सिंह ने मौजूदा दशा को खतरनाक बताया। कहा, मीडिया और ब्यूरोक्रेसी समाज से ही निकल कर आता है, इसलिए पहले समाज को अच्छा बनना होगा। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलन से हुई।

हनुमानगढ़ी रामचौरा के महंत कमलदास जी महराज, डॉo अनिल कुमार मिश्रा, श्रृंगवेरपुर साहित्य एवं संस्कृति अकादमी के अध्यक्ष डॉo भृगु कुमार मिश्र, राजमणि शास्त्री, प्राचार्य उमा चौरसिया ने किया। संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष व वरिष्ठ पत्रकार बृजेंद्र प्रताप सिंह ने डिजिटल मीडिया को केंद्र में रखकर पत्रकारिता और लोकतंत्र के पहलुओं पर चर्चा की। कहा, संगठन में भीड़ बढ़ाने के बजाय, साफ सुथरी छवि के लोगों को शामिल किया जाए। पत्रकार हितों पर संगठन मजबूती से कार्य करेगा। वरिष्ठ पत्रकार हरिमंगल सिंह ने कहा कि पत्रकारिता में चुनौतियां हमेशा से रही है, यह आगे भी रहेगी। पत्रकारों को सामंजस्य बनाकर चलना होगा। प्रदेश अध्यक्ष रणविजय सिंह ने पत्रकारिता को व्यवसाय बनाने की बढ़ती प्रवृत्ति पर चर्चा की। कहा, पत्रकारों को आय का स्रोत पत्रकारिता के अलावा अलग से बनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता में आमदनी बड़ा संकट पैदा कर रही है। भाजपा के वरिष्ठ नेता शिव प्रसाद मिश्रा ने लोकतंत्र और पत्रकारिता दोनों में नैतिकता के संकट को समाज के लिए हानिकारक बताया। आशुतोष और वेदांश पाण्डेय ने गीत प्रस्तुत कर माहौल बदल दिया।
इलाहाबाद विश्वविद्यालय के असिस्टेंट प्रोफेसर अमितेश कुमार ने आदर्श और व्यवहार के सामंजस्य को लोकतंत्र, पत्रकारिता व पत्रकार तीनों के लिए बड़ी चुनौती बताया। कहा, इसका निदान खोजा जाना चाहिए। इलाहाबाद विश्वविद्यालय की असिस्टेंट प्रोफेसर स्मृति सुमन ने कहा कि मौजूदा समय में अभिजात्य वर्ग और मीडिया के नापाक गठबंधन ने लोकतंत्र और पत्रकारिता दोनों की दशा बिगाड़ी है।
खंड विकास अधिकारी लीलाधर शुक्ल, उमेश गुप्ता ने भी विचार रखे। संचालन शिवा शंकर पाण्डेय ने किया। इस अवसर पर राजेंद्र प्रसाद, मनोज कुमार पाण्डेय, विजय कुमार मिश्र के अलावा अशोक कुशवाहा, रिजवान सैफ खान, रामेश्वर पटेल, देवेंद्र त्रिपाठी, दूधनाथ पाण्डेय, महताब हुसैन, इंद्रमणि मिश्र, माधुरी मिश्रा, राजकुमारी मिश्रा समेत बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।
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