परानूपुर में श्रीरामकथा के चतुर्थ दिवस पर भक्ति का सागर उमड़ा
हजारों श्रद्धालुओं ने लिया सीता स्वयंवर कथा का दिव्य आनंद, भजनों पर झूमे भक्त
कुंडा (प्रतापगढ़)। कुँवर रघुराज प्रताप सिंह राजा भैया के संरक्षण तथा आनंद पांडेय के आयोजन में परानूपुर में चल रही श्रीरामकथा के चतुर्थ दिवस पर भक्तिभाव का अद्भुत वातावरण देखने को मिला। पूज्य राजन जी महाराज की रसपूर्ण, सरल-सहज वाणी से निकली कथारूपी अमृतधारा में जनमानस गोता लगाता रहा।
चतुर्थ दिवस की कथा में सीता स्वयंवर प्रसंग का जीवंत वर्णन करते हुए राजन जी महाराज ने कहा कि “पूजा में भाव की महत्ता होती है, प्रभु भक्त के भाव को देखते हैं। जब मन में प्रभु की छवि बस जाती है तो वही हर ओर दिखाई देते हैं।”
राजन जी महाराज ने भगवान श्रीराम द्वारा शिव धनुष उठाने और भंग करने का रोमांचकारी प्रसंग सुनाकर भक्तों को भाव-विभोर कर दिया। कथा पंडाल में जय श्रीराम के जयकारों से वातावरण गूंज उठा।
उन्होंने कहा कि राजा जनक ने जब सीता जी को भगवान शिव का धनुष उठाते देखा, तब उन्होंने प्रतिज्ञा की थी कि जो इस धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाएगा, वही सीता का वरण करेगा। अनेक राजा, गंधर्व और राक्षस रूपी योद्धा धनुष उठाने का प्रयास करते रहे, किंतु सफल न हुए। जब गुरु विश्वामित्र की आज्ञा से श्रीराम ने धनुष उठाया, तो पलभर में धनुष टूट गया। तभी देवताओं ने पुष्पवर्षा की और चारों ओर जयघोष गूंज उठा।
महाराज ने कहा — “भगवान भक्तों की आवश्यकता बिना मांगे ही पूरी करते हैं। यदि जीवन में कुछ न मिले, तो मांगने की वस्तु बदल लेनी चाहिए। मनोकामना पूर्ण हो जाने पर पूजा बंद नहीं, बल्कि और अधिक करनी चाहिए।”सीता स्वयंवर के इस दिव्य प्रसंग के साथ कथा स्थल पर आध्यात्मिक आनंद का अद्भुत माहौल रहा। श्रद्धालु भजनों पर झूमते नजर आए।
राजन जी महाराज ने बताया कि बुधवार को कथा के पंचम दिवस में अयोध्या से मिथिला तक बारात यात्रा व मिथिला में बारात के आतिथ्य सत्कार का वर्णन किया जाएगा।
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