धनतेरस 2025: आरोग्य, समृद्धि और शुभता का प्रारंभ — जानिए पूजा विधि, शुभ मुहूर्त और खास उपाय

धनतेरस 2025: आरोग्य, समृद्धि और शुभता का प्रारंभ — जानिए पूजा विधि, शुभ मुहूर्त और खास उपाय

दैनिक चक्र डिजिटल डेस्क। दीपावली पर्व की शुरुआत धनतेरस से होती है, जिसे धनत्रयोदशी भी कहा जाता है। यह दिन आरोग्य, दीर्घायु और धन-समृद्धि का प्रतीक माना गया है। शास्त्रों में वर्णन है कि इसी दिन समुद्र मंथन से भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। इसलिए इस दिन उनकी पूजा का विशेष महत्व है। इसके साथ ही भगवान कुबेर और यमराज की आराधना करने का भी विधान है।

कुबेर की पूजा से धन और सौभाग्य मिलता है, वहीं यमराज की पूजा अकाल मृत्यु से रक्षा करती है। इस तरह धनतेरस को आरोग्य और समृद्धि का आरंभिक पर्व कहा जाता है।

भगवान धन्वंतरि की पूजा विधि

धनतेरस के दिन प्रदोष काल में भगवान धन्वंतरि की मूर्ति या चित्र को स्थापित करें। उत्तर-पूर्व दिशा में बैठकर पूजा करना शुभ माना गया है।

सबसे पहले दीपक के नीचे खील या चावल रखें और दीपक जलाएं। एक कलश में शुद्ध जल भरकर भगवान को अर्पित करें।

फिर रोली, कुमकुम, हल्दी, फूल, पान, फल, मिष्ठान आदि से पूजा करें।

पूजन के दौरान यह मंत्र जपें —

“ॐ नमो भगवते धन्वंतराय विष्णुरूपाय नमो नमः।”

यह मंत्र रोगों से मुक्ति और दीर्घायु प्रदान करने वाला माना गया है।

भगवान कुबेर की आराधना

धनतेरस के दिन धन के देवता कुबेर की पूजा भी अत्यंत फलदायी मानी जाती है।

शाम के समय उत्तर दिशा में कुबेर यंत्र स्थापित करें, उस पर गंगाजल छिड़कें और रोली-चावल से तिलक करें।

फूल और दीपक चढ़ाकर यह मंत्र जपें —

“ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धनधान्याधिपतये।

धनधान्यसमृद्धिं मे देहि दापय स्वाहा॥”

इसके बाद कुबेर की आरती कर उनसे सुख-समृद्धि और धनवृद्धि की कामना करें।

यमराज के लिए दीपदान

धनतेरस की शाम यमराज की पूजा का भी विशेष महत्व है।

प्रदोष काल में घर के मुख्य द्वार के बाहर, दक्षिणमुख होकर अन्न की ढेरी पर चारमुखी तेल का दीपक जलाएं।

यह दीपक यमराज को समर्पित माना जाता है। दीपक जलाते समय प्रार्थना करें कि वे आपके परिवार को दीर्घायु और सुरक्षा का आशीर्वाद दें तथा किसी की अकाल मृत्यु न हो।

धनतेरस पूजा का शुभ मुहूर्त

इस वर्ष धनतेरस शनिवार, 18 अक्टूबर 2025 को पड़ेगी।

पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 7:16 बजे से रात 8:20 बजे तक रहेगा।

इसी समय भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और भगवान कुबेर की आराधना करना अत्यंत मंगलकारी माना गया है।

खरीदारी का शुभ समय

धनतेरस पर सोना-चांदी, धातु और बर्तन खरीदने का शुभ समय

दोपहर 12:18 बजे से लेकर अगली सुबह 6:24 बजे तक रहेगा।

इस दौरान की गई खरीदारी को धनवृद्धि और शुभता का प्रतीक माना जाता है।

खास उपाय: धनवर्षा पोटली से बरसेगी लक्ष्मी-कुबेर की कृपा

धनतेरस की शाम किया जाने वाला धनवर्षा पोटली उपाय अत्यंत प्रभावशाली माना गया है।

एक लाल रेशमी कपड़े में —

एक चांदी का सिक्का,

पांच कौड़ियां,

एक हल्दी की गांठ,

एक सुपारी,

थोड़े चावल,

गुलाब के सूखे फूल,

और थोड़ा इत्र या कपूर रखकर पोटली बनाएं।

अब इस पोटली को अपने सामने रखकर मां लक्ष्मी और भगवान कुबेर का ध्यान करें और यह मंत्र 11 बार जपें —

“ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं श्री सिद्ध लक्ष्म्यै नमः।”

इसके बाद इस पोटली को अपनी तिजोरी या धन रखने की जगह पर रख दें।

माना जाता है कि यह उपाय घर में धन की वृद्धि करता है, आर्थिक रुकावटें दूर करता है और वर्षभर लक्ष्मी-कुबेर की कृपा बनाए रखता है।

दैनिक चक्र परिवार की ओर से सभी पाठकों को धनतेरस की हार्दिक शुभकामनाएँ।

आपका जीवन सुख, स्वास्थ्य और समृद्धि से परिपूर्ण रहे।

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