तहसील सदर में भ्रष्टाचार पर भड़के अधिवक्ता, चेतावनी—लगाम नहीं लगी तो होगा आंदोलन

तहसील सदर में भ्रष्टाचार पर भड़के अधिवक्ता, चेतावनी—लगाम नहीं लगी तो होगा आंदोलन

बैठक में मौजूद दयाशंकर एडवोकेट, पंकज राजपूत एडवोकेट व अन्य अधिवक्ता

पवन सूर्यवंशी ब्यूरो चीफ ऑल एनसीआर

फर्रुखाबाद। तहसील सदर में व्याप्त भ्रष्टाचार को लेकर अधिवक्ताओं का आक्रोश अब खुलकर सामने आने लगा है।शनिवार को वरिष्ठ अधिवक्ता दयाशंकर तिवारी के चैम्बर में आयोजित एक अनौपचारिक बैठक में वकीलों ने तहसील प्रशासन को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि यदि जल्द ही भ्रष्टाचार पर अंकुश नहीं लगाया गया, तो अधिवक्ता आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे।बैठक में वादों की नियमित सुनवाई न होने, सुनवाई के बाद महीनों तक आदेश पारित न होने तथा न्यायालयों और कार्यालयों में बाहरी व अनाधिकृत कर्मचारियों द्वारा काम किए जाने जैसे गंभीर मुद्दों पर गहरी नाराजगी व्यक्त की गई। अधिवक्ताओं ने कहा कि इन अव्यवस्थाओं के चलते वादकारियों को वर्षों तक चक्कर लगाने पड़ते हैं और न्याय मिलने में अनावश्यक देरी हो रही है।अधिवक्ता अनुराग तिवारी ने कहा कि अधिकारियों और कर्मचारियों की मनमानी के कारण वादकारी व अधिवक्ता दोनों परेशान हैं। “तारीख पर तारीख” की परंपरा ने न्याय व्यवस्था को प्रभावित किया है, जिसे अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने सभी अधिवक्ताओं से एकजुट होकर इन अनियमितताओं के खिलाफ संघर्ष करने का आह्वान किया। वहीं पंकज राजपूत एडवोकेट ने आरोप लगाया कि कई मामलों में नियमों के विरुद्ध आदेश पारित कर दिए जाते हैं, जिनमें वर्षों तक संशोधन नहीं होता। इससे अधिवक्ता और वादकारी दोनों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि “हमने काला कोट न्याय की लड़ाई के लिए पहना है, लेकिन आज हमें ही अन्याय और भ्रष्टाचार झेलना पड़ रहा है।” उन्होंने तहसील बार एसोसिएशन की निष्क्रियता पर भी सवाल उठाए और कहा कि इसी कारण अधिकारी बेलगाम हो गए हैं। वरिष्ठ अधिवक्ता दयाशंकर तिवारी ने बताया कि कायमगंज अधिवक्ता संघ द्वारा समर्थन मांगा गया है, जिसकी मांगों का अध्ययन कर जल्द ही निर्णय लिया जाएगा। उन्होंने संकेत दिए कि यदि स्थिति में सुधार नहीं हुआ, तो व्यापक स्तर पर आंदोलन किया जा सकता है। बैठक में दयाशंकर तिवारी, अनुराग तिवारी, प्रवीन सक्सेना, अजय प्रताप सिंह, भानु प्रताप सिंह, पंकज राजपूत, महेंद्र प्रताप सिंह, रमेश यादव, रवनेश यादव, मंजेश कटियार, जनार्दन राजपूत, राजीव चौहान, प्रदीप सक्सेना, प्रघुम्न कुमार गुप्ता, प्रकाश द्विवेदी, जितेंद्र सक्सेना, मुन्ना यादव, गोविंद अवस्थी, संतोष सक्सेना, दिलीप सक्सेना, योगेश दीक्षित सहित बड़ी संख्या में अधिवक्ता मौजूद रहे। दो अधिवक्ताओं के बीच हुआ ‘राम-भरत मिलाप’बैठक के दौरान एक सकारात्मक पहल भी देखने को मिली। लंबे समय से दो गुटों में नजर आने वाले अधिवक्ता रवनेश चंद्र यादव और जनार्दन राजपूत के बीच चल रहे मतभेद वरिष्ठ अधिवक्ता दयाशंकर तिवारी की पहल पर समाप्त हो गए। दोनों अधिवक्ताओं ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर गले लगाया। इस ‘राम-भरत मिलाप’ का उपस्थित अधिवक्ताओं ने तालियां बजाकर स्वागत किया, जिससे बैठक का माहौल सौहार्दपूर्ण हो गया।

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