इलाहाबाद हाईकोर्ट की पुलिस को कड़ी फटकार, वाहवाही और पीठ थपथपाने के लिए न लगाएं गैंगस्टर एक्ट
संवाददाता बिपिन मिश्रा
प्रयागराज इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गैंगस्टर एक्ट के दुरुपयोग को लेकर उत्तर प्रदेश पुलिस के खिलाफ बेहद तल्ख टिप्पणी की है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पुलिस अपनी वाहवाही लूटने या खुद का महिमामंडन करने के लिए इस कठोर कानून का इस्तेमाल एक हथियार की तरह नहीं कर सकती। सामान्य धाराओं की अपग्रेडेड कॉपी नहीं है गैंगस्टर एक्ट कोर्ट ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि गैंगस्टर एक्ट कोई सामान्य धाराओं की अपग्रेडेड कॉपी नहीं है, जिसे हर छोटे-बड़े मामले में बिना सोचे-समझे लगा दिया जाए। यह एक अत्यंत कठोर कानून है, जिसका प्रयोग बहुत ही सावधानी और जिम्मेदारी के साथ किया जाना चाहिए।न्यायमूर्ति की पीठ ने बस्ती जिले के निवासी उस्मान की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा,कोर्ट ने उस्मान के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत दर्ज मामले में उसकी गिरफ्तारी पर रोक लगाई तत्काल प्रभाव से हाईकोर्ट ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित विवेचक (IO) और थाना प्रभारी से 4 सप्ताह के भीतर जवाब मांगा है।सुनवाई के दौरान माननीय न्यायालय ने पुलिस प्रशासन को आईना दिखाते हुए कई अहम बातें कहीं,गैंगस्टर एक्ट एक विशेष कानून है। इसे केवल उन अपराधियों पर लगाया जाना चाहिए जो संगठित अपराध में लिप्त हों, न कि हर मामले में पुलिस की फाइलें भरने के लिए। पुलिस को अपनी पीठ थपथपाने या नंबर बढ़ाने के लिए किसी नागरिक की स्वतंत्रता से खिलवाड़ करने का अधिकार नहीं है। कोर्ट ने पाया कि कई मामलों में पुलिस बिना उचित साक्ष्यों के केवल रिकॉर्ड के लिए यह कार्रवाई कर देती है, जो कानून की भावना के विपरीत है। पुलिस यह न भूले कि गैंगस्टर एक्ट एक असाधारण शक्ति है। इसका प्रयोग विवेकपूर्ण होना चाहिए, केवल दिखावे के लिए नहीं। अब पुलिस विभाग को चार हफ्ते के भीतर कोर्ट में यह स्पष्ट करना होगा कि इस मामले में गैंगस्टर एक्ट लगाने के ठोस आधार क्या थे। इस फैसले के बाद प्रदेश भर में गैंगस्टर एक्ट के तहत की जा रही कई कार्यवाहियों पर असर पड़ने की संभावना है।
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