“मिडनाइट माइनिंग माफिया का पर्दाफाश: पत्रकार पहुंचते ही खेत बना रणभूमि, गाड़ियां छोड़ीं, ड्राइवर फरार—अब ‘बड़े नाम’ घेरे में!”
जिला संवाददाता: ताम्रध्वज साहू
बेमेतरा: जिले के सिद्धि माता मंदिर तीनपेड़या बांधा क्षेत्र में देर रात अवैध खनन का सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। रात करीब 11 बजे अंधेरे की आड़ में जेसीबी मशीनों और हाईवा वाहनों के जरिए खुलेआम मिट्टी का अवैध उत्खनन किया जा रहा था। यह गतिविधि न केवल खनन नियमों की धज्जियां उड़ा रही थी, बल्कि पर्यावरण संतुलन और किसानों की उपजाऊ जमीन के लिए भी बड़ा खतरा बन चुकी है। घटना ने उस वक्त नाटकीय मोड़ ले लिया जब एक स्थानीय पत्रकार मौके पर पहुंच गया। पत्रकार की अचानक मौजूदगी से पूरे इलाके में हड़कंप मच गया। जेसीबी ऑपरेटर और हाईवा ड्राइवरों में ऐसी भगदड़ मची कि वे अपनी गाड़ियां और मशीनें खेतों के बीच ही छोड़कर अंधेरे में फरार हो गए। मौके पर खड़ी छोड़ी गई भारी मशीनरी इस पूरे अवैध खेल की मूक गवाह बन गई। स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, जिन वाहनों का इस्तेमाल इस खनन में किया जा रहा था, उनका संबंध ग्राम पंचायत ओटेबंध निवासी बाहल सिंह वर्मा से बताया जा रहा है। ग्रामीणों का दावा है कि उक्त व्यक्ति का नाम पहले भी विवादों और कथित धोखाधड़ी मामलों में सामने आ चुका है हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हो पाई है, लेकिन लगातार उठते सवालों ने मामले को और गंभीर बना दिया है। इस पूरे घटनाक्रम ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है। सवाल यह उठता है कि इतनी बड़े पैमाने पर अवैध खनन गतिविधि आखिर किसके संरक्षण में चल रही थी? क्या संबंधित अधिकारी वास्तव में अनजान थे, या फिर यह सब उनकी जानकारी और कथित मिलीभगत से हो रहा था? क्षेत्र में लगातार हो रहे इस अवैध उत्खनन से किसानों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है, क्योंकि उनकी जमीन की उर्वरता और संरचना को भारी नुकसान पहुंच रहा है। ग्रामीणों ने प्रशासन से सख्त मांग की है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में इस तरह के अवैध खनन पर पूरी तरह रोक लग सके। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस खुलासे के बाद कितनी तेजी और गंभीरता से कदम उठाता है, या फिर यह मामला भी अन्य मामलों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा।फिलहाल, खेतों में खड़ी छोड़ी गई मशीनें और भागते ड्राइवर एक ही कहानी बयां कर रहे हैं—यह सिर्फ अवैध खनन नहीं, बल्कि सिस्टम की खामोशी का भी खुला खेल है।












