सरकारी जमीन पर बुलडोजर, चकमार्ग पर खामोशी: सुल्तानपुर में राजस्व विभाग की कार्रवाई पर उठे सवाल
संवाददाता: आयशा अल गजल

सुल्तानपुर में सरकारी जमीन से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के बाद अब राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। एक ही तहसील क्षेत्र में दो अलग-अलग मामलों में विभाग के भिन्न-भिन्न रवैये ने लोगों को हैरान कर दिया है। एक ओर जहां सरकारी भूमि से अवैध कब्जा हटाने के लिए बुलडोजर चलाया गया, वहीं दूसरी ओर चकमार्ग पर बने अवैध निर्माण को लेकर कथित उदासीनता सामने आई है। पहला मामला सदर तहसील के निजामपट्टी ग्राम सभा का है, जहां गाटा संख्या 132/0.025 हेक्टेयर बंजर ग्राम सभा भूमि पर अवैध कब्जे के खिलाफ सख्त कार्रवाई की गई। सदर तहसीलदार देवानंद तिवारी के निर्देश पर हल्का लेखपाल (रतनपुर) सुनील सिंह ने राजस्व टीम और पुलिस बल की मौजूदगी में अतिक्रमण हटवाया। अधिकारियों के अनुसार, कब्जेदार तसलीम निवासी ग्राम परवर को कई बार कब्जा हटाने की चेतावनी दी गई थी, लेकिन जब उसने आदेशों की अनदेखी की तो मजबूरन कार्रवाई की गई। इसके साथ ही आरोपी के खिलाफ कोतवाली नगर में तहरीर देकर मामला भी दर्ज कराया गया।
दूसरा मामला घरहाखुर्द डिहवा निवासी अनवर अली पुत्र जौवाद से जुड़ा है, जिन्होंने राजस्व विभाग पर गंभीर आरोप लगाए हैं। अनवर अली का कहना है कि उनकी पत्नी के नाम ग्राम हरिहरईशापुर में गाटा संख्या 812 में प्लॉट है। इस प्लॉट के दक्षिण में स्थित चकमार्ग संख्या 1030 पर मोहम्मद कलीम निवासी नई बस्ती हरिहरईशापुर ने अवैध रूप से कब्जा कर टीन शेड डालकर गैरेज बना लिया है।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि इस अवैध कब्जे को हटाने के लिए कई बार शिकायत की गई, लेकिन राजस्व निरीक्षक की निष्क्रियता के चलते आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
कोतवाली नगर पुलिस की रिपोर्ट में भी पुष्टि की गई है कि मोहम्मद कलीम ने चकमार्ग की जमीन पर अवैध कब्जा कर गैरेज बनाया है। पुलिस के अनुसार, 13 जुलाई 2024 को इस मामले में सार्वजनिक संपत्ति नुकसान निवारण अधिनियम 1984 के तहत मुकदमा दर्ज कर विवेचना के बाद एक माह के भीतर आरोप पत्र भी दाखिल किया जा चुका है। इसके बावजूद अनवर अली का कहना है कि चकमार्ग पर बना अवरोध अब भी जस का तस है और उन्हें राजस्व विभाग से अपेक्षित सहयोग नहीं मिल पा रहा है।
अब सवाल यह उठ रहा है कि जब एक मामले में तत्काल कार्रवाई संभव है, तो दूसरे मामले में महीनों बाद भी अतिक्रमण क्यों नहीं हटाया गया। इस विरोधाभासी रवैये को लेकर आमजन के बीच चर्चा तेज हो गई है और उच्चाधिकारियों से निष्पक्ष जांच की मांग की जा रही है।












