UGC,के नए नियम सामान्य वर्ग को दबाने व कुचलने का प्रयास है!हाथों में बेड़िया, तन पर कफन पहन कर दिया ज्ञापन!!बीके शर्मा हनुमान

UGC,के नए नियम सामान्य वर्ग को दबाने व कुचलने का प्रयास है!हाथों में बेड़िया, तन पर कफन पहन कर दिया ज्ञापन!!बीके शर्मा हनुमान

संवाददाता पवन सूर्यवंशी एनसीआर

नए नियमों के बाद सामान्य वर्ग के शिक्षार्थियों के लिए शिक्षा ग्रहण करना व शिक्षकों के लिए पढाना असंभव हो जाएगा!नए नियम समाज में भेदभाव पैदा कर अराजकता फैलाने का काम करेंगे!
हाथों में बेड़िया, तन पर कफन पहन कर दिया ज्ञापन!!बीके शर्मा हनुमान

गाजियाबादः विश्व ब्रह्मऋषि ब्राह्मण महासभा के पीठाधीश्वर ब्रह्मऋषि विभूति बी के शर्मा हनुमान ने कहा कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग, यूजीसी के नए नियम ना सिर्फ सामान्य वर्ग को दबाने व कुचलने का प्रयास है, बल्कि इससे समाज में भेदभाव को बढावा मिलेगा। नए नियमों के बाद सामान्य वर्ग के शिक्षार्थियों के लिए तो शिक्षा ग्रहण करना ही असंभव हो जाएगा। अगर सरकार ने इन नियमों को वापस नहीं लिया तो यह समाज व देश के लिए बहुत घातक साबित होगा। ब्रह्मऋषि विभूति बी के शर्मा हनुमान ने कहा कि नए नियमों के मुताबिक हर कॉलेज-यूनिवर्सिटी में एक इक्विटी कमेटी बनेगी। इस कमेटी में एससी, एसटी, ओबीसी, महिला और दिव्यांग वर्ग के प्रतिनिधियों का होना अनिवार्य है। ऐसे में इक्विटी कमेटी में सामान्य वर्ग का सदस्य नहीं होने से जांच निष्पक्ष नहीं हो सकेगी। इतना ही नहीं इन नियमो का दुरुपयोग सामान्य वर्ग के शिक्षार्थियों, शिक्षकों व कर्मचारियों के खिलाफ किया जााएगा और उनके खिलाफ झूठी शिकायतें की जाएंगी क्योंकिं झूठी शिकायत करने पर सजा का प्रावधान हटा दिए जाने से झुठी शिकायत करने वालों पर कोई कार्रवाई नहीं होगी और सामान्य वर्ग के शिक्षार्थियों, शिक्षकों व कर्मचारियों का उत्पीडन, शोषण व दमन शुरू हो जाएगा जिससे उनके लिए कॉलेजों-यूनिवर्सिटी में पढना व कार्य करना असंभव हो जाएगा। ब्रह्मऋषि विभूति बी के शर्मा हनुमान ने कहा कि यह सभी चाहते हैं कि दलित और पिछड़े वर्ग के छात्रों के साथ किसी भी तरह का अन्याय नहीं होना चाहिए, लेकिन नियम बनाते समय सामाजिक संतुलन का ध्यान रखा जाना चाहिए था। हमारा संविधान भी समाज के सभी वर्गो को समान अधिकार व सम्मान देता है। यह नया नियम संविधान के विरूद्ध तो है ही, साथ ही सामान्य वर्ग के उत्पीड़न का माध्यम भी बनेगा।विश्वविद्यालय अनुदान आयोग, यूजीसी को भेदभाव रोकने वाले नियम बनाने चाहिए, न कि किसी वर्ग को असुरक्षित बनाकर उसके खिलाफ भेदभाव को बढावा देने वाले नियम बनाने चाहिए। भारतीय न्याय संहिता में पहले से ही भेदभाव से जुड़े मामलों के लिए प्रावधान मौजूद हैं, तो अलग से समिति बनाने की क्या जरूरत है। भेदभाव से जुड़े मामलों के लिए बने प्रावधान को ठीक प्रकार से लागू कर भेदभाव को खत्म किया जा सकता है। ब्रह्मऋषि विभूति बी के शर्मा हनुमान ने कहा कि नए नियमों को सामाजिक संतुलन के लिए नुकसानदेह बताते हुए सरकार से उन्हें तुरंत वापस लेने की मांग की और कहा कि ऐसा ना करना समाज व देश के लिए घातक साबित होगा और देश में अराजकता का माहौल पैदा होगा, जिसका फायदा देशविरोधी ताकतें उठा सकती हैं। इस अवसर पर वैश्य शिरोमणि परमार्थ सेवा ट्रस्ट के अध्यक्ष वी के अग्रवाल सुरेंद्र पाल त्यागी अनिल त्यागी प्रवीण त्यागी अश्वनी त्यागी सोबिंदर त्यागी रमेश चंद शर्मा धर्मेंद्र सिंह चौधरी एडवोकेट शैलेंद्र त्यागी कल्याण देव हिमांशु शर्मा पार्षद नरेंद्र मेहता सुभाष शर्मा पवन वर्मा श्यामलाल सरकार दिलीप कुमार अतुल शर्मा सुबोध कुमार मिश्रा मोहित कुमार देवाशीष ओझा एक जैन डॉक्टर नीरज गर्ग श्याम सिंह पुंडीर ऋषिपाल शर्मा सुजीत सिंह मिलन मंडल सहित सैकड़ो समाजसेवी सर्व समाज के प्रतिनिधि मौजूद थे

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