तो क्या अलीगंज में रामेश्वर सिंह और जुगेंद्र सिंह के बिना उतरेगी सपा?
संवाददाता योगेन्द्र सिंह
वायरल वीडियो के बाद सियासी चर्चाएं तेज, समर्थक बोले—दोनों भाइयों की अनदेखी पड़ सकती है भारी
एटा/अलीगंज। समाजवादी पार्टी से जुड़े एक कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव और अलीगंज के पूर्व विधायक रामेश्वर सिंह यादव के पुत्र सुबोध यादव के बीच बातचीत का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद एटा की राजनीति में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। वायरल वीडियो में पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को सुबोध यादव से बातचीत करते हुए देखा जा रहा है। इसी बातचीत को लेकर राजनीतिक हलकों में अलग-अलग तरह के कयास लगाए जा रहे हैं।
वहीं, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष जुगेंद्र सिंह यादव को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है। कुछ राजनीतिक लोगों का कहना है कि आने वाले समय में रामेश्वर सिंह यादव और उनके परिवार की समाजवादी पार्टी में भूमिका को लेकर बड़ा फैसला हो सकता है। हालांकि, वायरल वीडियो के आधार पर पार्टी की ओर से किसी निष्कासन या टिकट को लेकर कोई आधिकारिक निर्णय सामने नहीं आया है।
अगर ऐसा हुआ तो क्या होगा?
वायरल वीडियो के बाद अलीगंज विधानसभा क्षेत्र में तरह-तरह की राजनीतिक चर्चाएं चल रही हैं। कुछ लोग इसे पार्टी के भीतर सामान्य राजनीतिक बातचीत बता रहे हैं, जबकि कुछ समर्थक इसे गंभीर संकेत के रूप में देख रहे हैं।
रामेश्वर सिंह यादव के समर्थकों का कहना है कि यदि अलीगंज विधानसभा क्षेत्र में उनके परिवार को दरकिनार कर किसी अन्य चेहरे को टिकट दिया जाता है, तो इसका चुनावी असर देखने को मिल सकता है। समर्थक पिछले विधानसभा चुनाव में रामेश्वर सिंह यादव की हार के अंतर का भी हवाला दे रहे हैं और इसे बेहद कम अंतर बताते हैं।
समर्थक गिना रहे राजनीतिक आधार
रामेश्वर सिंह यादव और जुगेंद्र सिंह यादव के समर्थकों का कहना है कि जब प्रदेश में बड़ी संख्या में समाजवादी पार्टी के नेता भाजपा में चले गए थे, उस दौर में भी यादव परिवार समाजवादी पार्टी के साथ बना रहा। समर्थक यह भी दावा करते हैं कि परिवार के सदस्यों पर विभिन्न सरकारी कार्रवाइयों के बावजूद उन्होंने पार्टी नहीं छोड़ी।
वर्तमान में रेखा यादव एटा जिला पंचायत की अध्यक्ष हैं। समर्थक इसे विपक्ष में रहते हुए परिवार के राजनीतिक प्रभाव के तौर पर देखते हैं।
जिला पंचायत में भी परिवार की मौजूदगी
समर्थकों के मुताबिक यादव परिवार से जुड़े छह जिला पंचायत सदस्य वर्तमान में क्षेत्रीय राजनीति में उनकी पकड़ का संकेत देते हैं। उनका कहना है कि ये सदस्य चुनाव जीतकर जिला पंचायत पहुंचे हैं और इसे परिवार के जमीनी राजनीतिक प्रभाव से जोड़कर देखा जा सकता है।
हालांकि, इन दावों का वास्तविक चुनावी प्रभाव आगामी चुनाव में ही स्पष्ट होगा।
समर्थकों का दावा—अनदेखी का असर पड़ सकता है
रामेश्वर सिंह यादव और जुगेंद्र सिंह यादव के समर्थकों का कहना है कि दोनों नेताओं से बड़ी संख्या में कार्यकर्ता और समर्थक जुड़े हुए हैं। उनका दावा है कि अलीगंज समेत जिले की अन्य विधानसभा सीटों पर भी दोनों भाइयों का संगठनात्मक प्रभाव है।
समर्थकों का कहना है कि यदि पार्टी नेतृत्व टिकट वितरण में दोनों नेताओं के राजनीतिक आधार की अनदेखी करता है, तो इसका असर पार्टी के चुनावी प्रदर्शन पर पड़ सकता है।
राजनीति में अंतिम फैसला अभी बाकी
फिलहाल वायरल वीडियो के बाद राजनीतिक चर्चाएं जरूर तेज हो गई हैं, लेकिन समाजवादी पार्टी की ओर से अलीगंज विधानसभा सीट पर प्रत्याशी को लेकर कोई अंतिम घोषणा सामने नहीं आई है। ऐसे में अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि रामेश्वर सिंह यादव या उनके परिवार को पार्टी से बाहर किया जाएगा अथवा अलीगंज से किसी दूसरे चेहरे को मैदान में उतारा जाएगा।
एक बात जरूर है कि अलीगंज की राजनीति में रामेश्वर सिंह यादव और जुगेंद्र सिंह यादव का परिवार लंबे समय से सक्रिय रहा है। ऐसे में आने वाले समय में पार्टी नेतृत्व के फैसले और स्थानीय राजनीतिक समीकरण इस सीट की तस्वीर तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।












