प्रतापगढ़ फर्जी फर्मों से ₹42.65 करोड़ की साइबर ठगी की रकम का खेल, दो गिरफ्तार
संवाददाता विनय कुमार मिश्रा प्रतापगढ़। क्राइम ब्रांच ने फर्जी फर्मों के नाम पर करेंट और कॉर्पोरेट बैंक खाते खुलवाकर ऑनलाइन सट्टेबाजी, ट्रेडिंग फ्रॉड और अन्य साइबर ठगी की रकम की हेराफेरी करने वाले संगठित गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने गिरोह के दो सदस्यों शाकिब खान निवासी फ्रेजर रोड, पटना और संदीप कुमार निवासी बंदर बगीचा, पटना, बिहार को गिरफ्तार किया है।
पुलिस के अनुसार, आरोपियों के नियंत्रण वाले खातों से करीब ₹42.65 करोड़ की साइबर फ्रॉड राशि का लेन-देन सामने आया है। विभिन्न बैंकों में ऐसी 109 फर्मों के खाते सक्रिय पाए गए हैं। गृह मंत्रालय के समन्वय पोर्टल की प्रारंभिक जांच में आरोपियों से जुड़े बैंक खाते और मोबाइल नंबर 500 से अधिक साइबर अपराध शिकायतों से लिंक मिले हैं।
मामला थाना कोतवाली देहात में दर्ज उस शिकायत की जांच के दौरान सामने आया, जिसमें भुवालपुर डोमीपुर निवासी डॉ. सुमनेश सिंह के बैंक खाते से बिना सूचना के ₹2.50 लाख निकाल लिए गए थे।
जांच में सामने आया कि गिरोह फर्जी किरायानामा, उद्यम/एमएसएमई और जीएसटी पंजीकरण जैसे दस्तावेजों के आधार पर अलग-अलग लोगों के नाम पर फर्जी फर्में बनवाता था। इन फर्मों के नाम पर बैंक खाते खुलवाकर उनके सिम कार्ड और ई-मेल आईडी समेत खातों का नियंत्रण अपने पास रखा जाता था। इन खातों का इस्तेमाल साइबर ठगी से प्राप्त रकम को इधर-उधर करने के लिए किया जाता था।
पुलिस को जांच में एक ही पते पर कई फर्मों के पंजीकरण और एक ही मोबाइल नंबर से कई फर्मों के जुड़े होने के साक्ष्य भी मिले हैं। आरोपियों को इन खातों के जरिए होने वाले लेन-देन के बदले कमीशन मिलने की बात सामने आई है।
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से एक लैपटॉप, एक POS मशीन, छह मोबाइल फोन, छह पेन ड्राइव, कार्ड रीडर, डिजिटल सिग्नेचर डिवाइस, चिप, विभिन्न बैंकों की चेकबुक, एटीएम कार्ड और QR कोड सहित अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण व दस्तावेज बरामद किए हैं।
पूछताछ में ऑनलाइन सट्टेबाजी वेबसाइट, फर्जी ट्रेडिंग एवं निवेश योजनाओं, कोरियर के नाम पर ठगी और वायरसयुक्त APK के जरिए साइबर अपराध से जुड़े नेटवर्क के बारे में भी जानकारी सामने आई है। पुलिस संबंधित राज्यों की साइबर क्राइम इकाइयों से समन्वय कर मामले की आगे जांच कर रही है।
आरोपियों के खिलाफ बीएनएस की धारा 318(4), 319(2) और आईटी एक्ट की धारा 66डी के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था। विवेचना के दौरान साक्ष्यों के आधार पर बीएनएस की धारा 336(3), 338, 340(2), 112(2), 61(2), 45 और 3(5) की भी बढ़ोतरी की गई है।












