सड़क नवीनीकरण में मानकों की खुली धज्जियाँ, ग्रामीणों में उबाल
प्रतापगढ़ जिले के सांगीपुर क्षेत्र में सड़क नवीनीकरण कार्य को लेकर भारी लापरवाही सामने आई है। ग्रामीणों का आरोप है कि योगी सरकार द्वारा विकास कार्यों के लिए जारी धन का सही उपयोग नहीं किया जा रहा, और भ्रष्टाचार के कारण सरकारी परियोजनाएँ केवल कागजों में ही चमकती दिखाई देती हैं। धरातल पर स्थिति बिल्कुल उलट है, जहाँ कार्य में खुला खेल चल रहा है और अधिकारी मूकदर्शक बने हुए हैं।चार दिन पहले शुरू हुआ था मरम्मत कार्य, दो दिन बाद ही उखड़ने लगी सड़क
लोक निर्माण विभाग-2 की देखरेख में रामगंज रोड से नौगीर गांव तक जाने वाली सड़क काफी समय से खराब हालत में थी। गड्ढों से भरी इस सड़क ने ग्रामीणों का जीना मुश्किल कर दिया था। शिकायतों के बाद करीब चार दिन पहले सड़क मरम्मत कार्य शुरू कराया गया, लेकिन मानकों की अनदेखी इतनी भारी थी कि मरम्मत के सिर्फ दो-तीन दिन बाद ही सड़क की पीसी गिट्टी उखड़कर इधर-उधर बिखरने लगी।ग्रामीणों ने बताया कि ठेकेदार द्वारा गिट्टी और तारकोल का मिश्रण गुणवत्ता के अनुसार नहीं किया गया। सड़क पर डाली जा रही गिट्टी भी मानकों से कमतर है। तारकोल की मात्रा बेहद कम रखी गई, जिससे सड़क की मजबूती शुरू से ही संदिग्ध हो गई।
ठेकेदार का चौंकाने वाला बयान – “सरकारी काम ऐसे ही होता है!”
मौके पर काम देख रहे ग्रामीणों ने जब ठेकेदार से पूछा कि सड़क पर गिट्टी और डामर की सही मात्रा क्यों नहीं डाली जा रही है, तो उसका जवाब सुनकर लोग हैरान रह गए। ठेकेदार ने बेखौफ होकर कहा—
“सरकारी काम ऐसे ही किया जाता है। अधिकारियों को कमीशन देना पड़ता है, क्या मैं अपने घर से दूँगा?”
इस बयान ने ग्रामीणों में और अधिक नाराजगी पैदा कर दी। लोगों का कहना है कि जब ठेकेदार खुद स्वीकार कर रहा है कि कमीशन और भ्रष्टाचार के कारण काम अधूरा और निम्न मानक का किया जा रहा है, तो फिर ऐसे कार्यों की निगरानी करने वाले अधिकारी आखिर क्या कर रहे हैं?
ग्रामीणों में उग्र आक्रोश, कार्रवाई की मांग
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि जब भी सड़क मरम्मत की बात आती है, अधिकारी केवल खानापूर्ति के लिए दो-तीन दिन का काम करवा देते हैं। पैसे की बंदरबांट पूरी कर ली जाती है और कुछ दिनों में सड़क फिर से पुराने हालात में पहुँच जाती है।अब ग्रामीणों की मांग है कि इस मामले की जांच कर दोषी अधिकारियों व ठेकेदार के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते सही कार्रवाई नहीं हुई तो वे बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे।
क्या करेगा लोक निर्माण विभाग?
अब सबकी निगाहें लोक निर्माण विभाग पर टिकी हैं क्या विभाग इस लापरवाही पर कठोर कदम उठाएगाया फिर हमेशा की तरह सरकारी धन के बंदरबांट के बीच यह मामला भी ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगाग्रामीणों का कहना है कि वे इस बार चुप नहीं बैठेंगे और सही जांच तक आवाज उठाते रहेंगे।
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