बढ़ती ठंड में बस स्टैंड बना बेघर यात्रियों की मजबूरी, रैन बसेरा व्यवस्था नदारद

बढ़ती ठंड में बस स्टैंड बना बेघर यात्रियों की मजबूरी, रैन बसेरा व्यवस्था नदारद

जिला संवाददाता काव्यांश रावत

जैसे-जैसे दिसंबर की ठंड अपना असर दिखाने लगी है, रातें कड़ाके की ठंड के साथ मुश्किल होती जा रही हैं। तापमान में लगातार गिरावट के बीच नगर पालिका प्रशासन की उदासीनता अब यात्रियों पर भारी पड़ने लगी है। बस स्टैंड पर अब तक रैन बसेरे की कोई व्यवस्था न होने के कारण राहगीर और यात्री ठिठुरती ठंड में खुले फर्श पर रात गुजारने को मजबूर हैं। शनिवार देर रात बस स्टैंड पर पहुंचे यात्रियों को कासगंज, दिल्ली और आगरा जाने वाली बसों के लिए लंबे समय तक इंतजार करना पड़ा। बसों के देर से पहुंचने के कारण कई यात्रियों ने मजबूरी में ठंडे फर्श पर चादर या गमछा बिछाकर बैठकर समय काटा। इस दौरान महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों को सबसे ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ा। यात्रियों का कहना है कि ठंड इस कदर बढ़ चुकी है कि खुले में बैठ पाना मुश्किल हो गया है, लेकिन प्रशासन की ओर से न तो रैन बसेरा उपलब्ध कराया गया है और न ही किसी प्रकार का शीतकालीन इंतजाम दिखाई दे रहा है। न गर्म पानी की व्यवस्था है, न कंबल और न ही बैठने के लिए सुरक्षित स्थान। लोगों ने नाराजगी जताते हुए कहा कि हर साल रैन बसेरा तैयार करने की बात तो की जाती है, लेकिन हकीकत में सिर्फ कागजी औपचारिकताएं ही पूरी की जाती हैं। जमीनी स्तर पर आज भी यात्रियों को बदहाल स्थिति का सामना करना पड़ रहा है।

यात्रियों और स्थानीय लोगों ने मांग की है कि तत्काल प्रभाव से बस स्टैंड पर रैन बसेरे की व्यवस्था की जाए, साथ ही कंबल, अलाव और गर्म पानी जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं, ताकि ठंड में रात गुजारने को मजबूर लोगों को कुछ राहत मिल सके।

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