तीर्थराज प्रयाग में पौष पूर्णिमा से शुरू होगा कल्पवास, जन्म-जन्मांतर के पापों से मुक्ति का पर्व
संवाददाता: आदित्य द्विवेदी प्रयागराज। संगम तीरे माघ माह में किया जाने वाला कल्पवास अत्यंत पुण्यकारी माना गया है। इस दौरान गृहस्थ समस्त मोह-माया से विरक्त होकर भजन-पूजन और साधना में लीन रहते हैं। कल्पवासी न तो किसी सुविधा की अपेक्षा रखते हैं और न ही किसी प्रकार की आस। दिन में तीन बार गंगा स्नान, एक समय सात्विक भोजन तथा दिनभर धार्मिक ग्रंथों के अध्ययन और प्रवचनों के श्रवण में समय व्यतीत किया जाता है।
तीर्थराज प्रयाग के संगम तट पर लगने वाले माघ मेले में कल्पवास का विशेष महत्व है। पौष पूर्णिमा से लेकर महाशिवरात्रि तक चलने वाले इस अनुष्ठान में श्रद्धालु भजन, पूजन और तपस्या में लीन रहते हैं। शास्त्रों के अनुसार कल्पवास 12 वर्षों में पूर्ण होता है तथा इसके कठोर नियमों का पालन करना आवश्यक होता है।
पद्म पुराण, अग्नि पुराण और स्कंद पुराण में कल्पवास की महिमा का विस्तार से वर्णन किया गया है। मान्यता है कि कल्पवास करने से जन्म-जन्मांतर के पापों से मुक्ति मिलती है, पूर्वजों की तृप्ति होती है और मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है।
इन्हीं धार्मिक संकल्पनाओं को साकार करने के उद्देश्य से तीर्थराज प्रयाग में संगम तट पर माहभर चलने वाला अखंड तप—कल्पवास—3 जनवरी पौष पूर्णिमा से आरंभ होगा, जो 15 फरवरी महाशिवरात्रि तक चलेगा। इस अवधि में श्रद्धालु भजन, पूजन और विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों में सहभागी बनेंगे।
संवाददाता: आदित्य द्विवेदी
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