फर्रुखाबाद में खाकी पर भारी पड़ा कानून
स्टेट संवाददाता विष्णु रावत


वकील की चोटी काटने और लूटपाट के दोषी दरोगा-सिपाही को 10-10 साल की सजा
फर्रुखाबाद जिले की विशेष अदालत ने पुलिस की वर्दी को शर्मसार करने वाले एक गंभीर मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। विशेष अदालत (एंटी डकैती) के न्यायाधीश शैलेंद्र सचान ने वकीलों के साथ मारपीट, लूटपाट और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने के अपराध में तत्कालीन दरोगा और सिपाही को 10-10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। यह फैसला कानून के राज और न्यायपालिका की निष्पक्षता का मजबूत संदेश देता है।
क्या है पूरा मामला?
यह घटना 10 जनवरी 2018 की है। मोहल्ला नेकपुर कलां निवासी अधिवक्ता शैलेंद्र कुमार शर्मा अपने साथी वकीलों शैलेंद्र सिंह और अमित तिवारी के साथ एक मारपीट की शिकायत दर्ज कराने फतेहगढ़ कोतवाली पहुँचे थे। आरोप है कि वहाँ ड्यूटी पर तैनात तत्कालीन कर्नलगंज चौकी प्रभारी अनिल भदौरिया और सिपाही सुरेंद्र सिंह ने अन्य पुलिसकर्मियों के साथ मिलकर वकीलों से अभद्रता, गाली-गलौज और मारपीट की।
हिरासत में प्रताड़ना और लूटपाट
पीड़ित अधिवक्ताओं के अनुसार, तीनों को रातभर हवालात में बंद रखकर बेरहमी से पीटा गया। आरोप है कि धार्मिक भावनाओं को आहत करने के उद्देश्य से अधिवक्ता शैलेंद्र शर्मा की चोटी काट दी गई, साथ ही उनसे सोने की अंगूठी, एटीएम कार्ड और ₹2000 नकद भी लूट लिए गए। जब थाने में उनकी रिपोर्ट दर्ज नहीं हुई तो पीड़ितों ने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया।
अदालत का सख्त रुख
लंबी सुनवाई और गवाहों के ठोस बयानों के आधार पर अदालत ने दरोगा अनिल भदौरिया (निवासी आगरा) और सिपाही सुरेंद्र सिंह (निवासी झांसी) को दोषी करार दिया।
न्यायालय के फैसले के मुख्य बिंदु:
जेल की सजा: दोनों दोषियों को 10-10 वर्ष का कठोर कारावास।
जुर्माना: प्रत्येक दोषी पर ₹61,000 का आर्थिक दंड, न चुकाने पर 6 माह की अतिरिक्त सजा।
मुआवजा: जुर्माने की राशि से तीनों पीड़ित वकीलों को ₹40,000-₹40,000 क्षतिपूर्ति।
सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता अनुज प्रताप सिंह ने बताया कि इस प्रकरण में दो अन्य आरोपी पुलिसकर्मियों को फिलहाल उच्च न्यायालय से राहत मिली हुई है, जबकि अनिल भदौरिया और सुरेंद्र सिंह को उनके कृत्य की सजा मिल चुकी है।
इस फैसले से आम जनता और अधिवक्ताओं में न्यायपालिका के प्रति विश्वास और अधिक मजबूत हुआ है, साथ ही यह संदेश भी गया है कि कानून से ऊपर कोई नहीं।












