13 वर्ष की उम्र में कुरआन हिफ़्ज़ कर रचा इतिहास, एक ही बैठक में 30 पारे सुनाकर बढ़ाया खानदान का मान

13 वर्ष की उम्र में कुरआन हिफ़्ज़ कर रचा इतिहास, एक ही बैठक में 30 पारे सुनाकर बढ़ाया खानदान का मान

बलरामपुर। संवाददाता: अब्दुल मजीद

हाफ़िज़ मोहम्मद हसनैन रज़ा बरकाती पुत्र मौलाना अबुल रहीम, जो नूरी मस्जिद मीठी खाड़ी, लमबाययत (सूरत) के खतीब व इमाम हैं, ने महज़ 13 वर्ष की उम्र में पूरा कुरआन-ए-पाक हिफ़्ज़ कर एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। इस कम उम्र में उन्होंने दारुल उलूम अनवारे रज़ा, नौसारी (गुजरात) में दो वर्षों तक शिक्षा ग्रहण कर अपने माता-पिता और शिक्षकों का नाम रोशन किया।
हाफ़िज़ हसनैन रज़ा बरकाती ने शिक्षकों और छात्रों की मौजूदगी में एक ही बैठक में कुरआन-ए-पाक के पूरे 30 पारे सुनाकर अपनी असाधारण प्रतिभा का परिचय दिया। उनकी इस उपलब्धि पर मदरसे के उलेमा, शिक्षकगण और छात्र बेहद प्रभावित हुए और उन्हें मुबारकबाद दी।
इस गौरवपूर्ण सफलता से न केवल उनके माता-पिता और शिक्षक बल्कि पूरे खानदान में खुशी की लहर दौड़ गई है। हाफ़िज़ हसनैन रज़ा बरकाती का अस्थायी पता सोनपुर, जिला बलरामपुर (उत्तर प्रदेश) बताया गया है। स्थानीय लोगों और धर्मप्रेमियों ने उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए दुआएं दी

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