“डिजिटल इंडिया को झटका! RTI शुल्क लेने से सचिव का इंकार – ‘PhonePe/Google Pay नहीं, पंचायत आओ’”
जिला संवाददाता ताम्रध्वज साहू
बेमेतरा | डिजिटल इंडिया और ऑनलाइन भुगतान को बढ़ावा देने के दावों के बीच बेमेतरा जिले के ग्राम पंचायत कुरदा से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां ग्राम पंचायत सचिव राजेंद्र कुमार मनहरे पर आरोप है कि उन्होंने सूचना का अधिकार (RTI) आवेदन शुल्क ऑनलाइन माध्यम से लेने से साफ इनकार कर दिया, जिससे आवेदक को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। जानकारी के अनुसार, आवेदक ने RTI आवेदन के लिए निर्धारित शुल्क जमा करने हेतु ग्राम पंचायत कुरदा सचिव राजेंद्र कुमार मनहरे से संपर्क किया और सुविधा के लिए PhonePe या Google Pay के माध्यम से भुगतान करने का प्रस्ताव रखा। लेकिन ग्राम पंचायत कुरदा सचिव राजेंद्र कुमार मनहरे ने फोन पर ही स्पष्ट शब्दों में मना कर दिया कि वे “फोन पे या गूगल पे के माध्यम से पैसा नहीं लेंगे।”इतना ही नहीं, आवेदक ने यह भी बताया कि जब उन्होंने बेमेतरा शहर में ही नकद राशि देने की बात कही, तब भी ग्राम पंचायत कुरदा सचिव राजेंद्र कुमार मनहरे ने इसे अस्वीकार कर दिया। ग्राम पंचायत कुरदा सचिव राजेंद्र कुमार मनहरे का कहना था कि “अगर पैसा देना है, तो ग्राम पंचायत कुरदा कार्यालय आना पड़ेगा, वहीं पर ही शुल्क लिया जाएगा, अन्य कहीं नहीं।” इस रवैये से आवेदक और स्थानीय नागरिकों में नाराजगी है। उनका कहना है कि जब सरकार डिजिटल भुगतान को बढ़ावा दे रही है, तब इस तरह का व्यवहार न केवल असुविधाजनक है, बल्कि नागरिकों के अधिकारों में बाधा डालने जैसा भी है। कई लोगों का यह भी कहना है कि पंचायत कार्यालय का नियमित रूप से खुला न रहना पहले से ही समस्या है, ऐसे में केवल वहीं भुगतान की शर्त लगाना लोगों को RTI से दूर करने की कोशिश लगती है। विशेषज्ञों के अनुसार, RTI अधिनियम 2005 का उद्देश्य नागरिकों को आसानी से सूचना उपलब्ध कराना है। यदि अधिकारी प्रक्रिया को जटिल बनाते हैं या अनावश्यक शर्तें लगाते हैं, तो यह कानून की मूल भावना के खिलाफ है। हालांकि, भुगतान के माध्यम को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश स्थानीय स्तर पर अलग-अलग हो सकते हैं, लेकिन सुविधा और पारदर्शिता को प्राथमिकता देना प्रशासन की जिम्मेदारी है। इस पूरे मामले ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या जमीनी स्तर पर डिजिटल इंडिया की पहल सही तरीके से लागू हो रही है या नहीं। जब एक साधारण RTI शुल्क जमा करने में इतनी बाधाएं सामने आ रही हैं, तो आम नागरिकों के लिए अपने अधिकारों का उपयोग करना कितना कठिन हो सकता है, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। आवेदक ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इस मामले में उचित समाधान नहीं निकला, तो वह उच्च अधिकारियों और राज्य सूचना आयोग तक शिकायत दर्ज कराएंगे।अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले को गंभीरता से लेता है या फिर ‘डिजिटल इंडिया’ केवल कागजों तक ही सीमित रह जाता है।












