उज्जैन के शमशान में 41 डिग्री के तापमान में अघोर साधना।
संवाददाता संतोष यादव उज्जैन।
उज्जैन के चक्र तीर्थ शमशान में दो अघोरी बाबा देखने को मिले हैं। जो चर्चा का विषय बने हुए हैं। जहां 41 डिग्री के तापमान में घर से निकलना मुश्किल हो रहा है। वही ये अघोरीबाबा अपने शरीर पर जलती गर्म चीता की राख लगाकर, जलते कंडो की धूनी रमाकर दोपहर के 12:00 से 3:00 बजे के बीच तंत्र साधना कर रहे हैं। इस तप्ती चील- चिलाती गर्मी में एक अघोरी पूरे समय खड़े रहते हैं। तो दूसरे मंत्र का जाप करते नजर आते हैं। यह बाबा खंडेश्वरी अघोरी योगी बाबा विष्णु नाथ महाराज और सोमेश्वर नाथ महाराज ने, अघोर अखाड़ा और सेनापति काल भैरव गौ सेवा संगठन के तत्वाधान में 29 अप्रैल से यह साधना प्रारंभ की थी। योगी विश्वनाथ महाराज ने बताया कि साधना 21 दिनों की होगी। जिसका समापन 19 मई को होगा। रोजाना 21 कंडे जलाकर शिप्रा नदी के समीप चक्रतीर्थ शमशान घाट पर, दुर्लभ और कठोर अष्टधुनि लगाते हैं। और मृत आत्माओं की शांति एवं विश्व कल्याण के लिए हर वर्ष यह तप करते हैं। तपोस्थली पर चल रही यह कठिन साधना को देखने के लिए प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु उज्जैन पहुंच रहे हैं। वही सिंहस्थ 2028 को आने में अभी 2 वर्ष बाकी है। पूरी अवंतिका नगरी (उज्जैन) का कायाकल्प नए सिरे से हो रहा है। इतनी भीषण गर्मी के बीच इस कठोर साधना में देश-विदेश से साधु, संत, महात्माओं का आना और श्रद्धालुओं का आगमन लगातार जारी है।












