एटा के स्कूल वाहन बने खतरा? बिना परमिट और अधूरे दस्तावेजों के साथ दौड़ रही बच्चों की बस
संवाददाता योगेन्द्र सिंह
जनपद एटा में स्कूल वाहनों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। एक जनपदीय रिपोर्ट में दावा किया गया है कि जिले के कई निजी स्कूलों के वाहन बिना वैध परमिट, अधूरे बीमा और जरूरी दस्तावेजों के सड़कों पर दौड़ रहे हैं। ऐसे में इन वाहनों में सफर करने वाले मासूम बच्चों की जिंदगी खतरे में बताई जा रही है।रिपोर्ट के अनुसार कई स्कूलों के वाहनों के परमिट की समय सीमा समाप्त हो चुकी है, इसके बावजूद वाहन लगातार संचालित किए जा रहे हैं। आरोप है कि स्कूल प्रबंधन इस ओर लापरवाही बरत रहे हैं और अभिभावकों को भी वाहनों की वैधता संबंधी जानकारी नहीं दी जा रही।
इन स्कूलों के नाम आए सामने
सूची में एटा, अलीगंज, आवागढ़, जैथरा, जलेसर और आसपास क्षेत्रों के कई स्कूल शामिल बताए गए हैं। इनमें प्रमुख रूप से सेंट पॉल्स स्कूल निधौली रोड, एसवीडी इंटरनेशनल स्कूल आवागढ़, डीपीएस पब्लिक स्कूल जीटी रोड एटा, जीडी इंटरनेशनल स्कूल अलीगंज, सिटी कॉन्वेंट स्कूल आवागढ़, साइंटिफिक इंटर कॉलेज जैथरा समेत कई अन्य शिक्षण संस्थानों के नाम शामिल हैं।
अभिभावकों से सतर्क रहने की अपील
रिपोर्ट में अभिभावकों से अपील की गई है कि वे अपने बच्चों को जिस वाहन से स्कूल भेज रहे हैं, उसके सभी जरूरी दस्तावेज अवश्य जांचें। खासतौर पर—
वाहन का परमिट वैध है या नहीं
बीमा (Insurance) अपडेट है या नहीं
ड्राइवर का लाइसेंस वैध है या नहीं
फिटनेस और अन्य कागजात पूरे हैं या नहीं
अभिभावकों से कहा गया है कि इन दस्तावेजों की कॉपी अपने पास भी रखें ताकि किसी दुर्घटना की स्थिति में जवाबदेही तय की जा सके।
दुर्घटना होने पर कौन होगा जिम्मेदार?
रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि यदि किसी वाहन का परमिट या बीमा समाप्त होने के बाद हादसा होता है तो स्कूल प्रबंधन जिम्मेदारी से बच सकता है। ऐसे में जान-माल का नुकसान सीधे अभिभावकों और बच्चों को उठाना पड़ सकता है।
जल्द सार्वजनिक हो सकती है वाहनों की सूची
रिपोर्ट जारी करने वालों का दावा है कि जल्द ही उन स्कूल वाहनों के नंबर और परमिट एक्सपायर होने की तारीख भी सार्वजनिक की जाएगी, ताकि अभिभावक पूरी सच्चाई जान सकें।
प्रशासनिक कार्रवाई पर भी उठे सवाल
लगातार कार्रवाई के निर्देशों के बावजूद यदि बिना परमिट वाले वाहन सड़कों पर दौड़ रहे हैं तो यह परिवहन विभाग और प्रशासनिक निगरानी पर भी सवाल खड़े करता है। अब देखना होगा कि जिला प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है।












