मेडिकल कॉलेज में नवजातों की अदला-बदली से मचा हड़कंप, नर्स और आया निलंबित
सीजर प्रसव के बाद बेटे-बेटी को लेकर एक घंटे तक बना रहा भ्रम, जांच में सामने आई लापरवाही
संवाददाता : पुष्पेंद्र कुमार




एटा। वीरांगना अवंती बाई मेडिकल कॉलेज में सीजर प्रसव के बाद दो नवजात शिशुओं की अदला-बदली का मामला सामने आने से हड़कंप मच गया। अस्पताल प्रशासन की जांच में लापरवाही पाए जाने पर एक स्टाफ नर्स और एक आया को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। जानकारी के अनुसार पैरोली थाना क्षेत्र निवासी 25 वर्षीय शिवानी पत्नी जुगेंद्र को सुबह करीब 8 बजे प्रसव के लिए मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया था। सीजर ऑपरेशन के लगभग एक घंटे बाद स्वास्थ्यकर्मियों ने परिजनों को कन्या जन्म की सूचना दी। जबकि प्रसूता शिवानी का दावा था कि उसे पुत्र हुआ है। इस पर परिजनों ने अस्पताल प्रशासन से शिकायत दर्ज कराई। इसी दौरान दूसरी प्रसूता 23 वर्षीय अफसाना पत्नी रवि को सुबह 7 बजे भर्ती किया गया था। ऑपरेशन के बाद अस्पताल कर्मियों ने अफसाना के परिजनों को पुत्र जन्म की जानकारी दी। बेटे के जन्म की खुशी में परिवार ने रिश्तेदारों को सूचना दी और न्योछावर भी बांटी। अफसाना के ससुर अमीर मुहम्मद ने बताया कि अस्पताल कर्मियों ने उन्हें पुत्र दिखाया था, लेकिन करीब एक घंटे बाद बताया गया कि बच्चे बदल गए हैं और वास्तव में उनकी बहू ने पुत्री को जन्म दिया है। उन्होंने कहा कि यदि शुरू से ही सही जानकारी दी जाती तो विवाद की स्थिति नहीं बनती। परिवार ने नवजात की तस्वीर भी खींची थी और खुशी में डॉक्टर को एक हजार रुपये न्योछावर दिए थे।
हंगामे के बाद शुरू हुई जांच
जब दोनों परिवारों को बच्चों की अदला-बदली की जानकारी मिली तो अस्पताल परिसर में हंगामा शुरू हो गया। मामला मेडिकल कॉलेज के वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचा, जिसके बाद तत्काल जांच कराई गई। जांच में नवजातों को परिजनों को सौंपने की प्रक्रिया में गंभीर लापरवाही सामने आई।
रिकॉर्ड जांच से स्पष्ट हुई वास्तविक पहचान
मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. बलबीर सिंह ने बताया कि दोनों महिलाओं का सीजर ऑपरेशन हुआ था। अफसाना की नवजात बच्ची के जन्म के तुरंत बाद पहली रोने की आवाज नहीं आई थी, इसलिए उसे बाल रोग विशेषज्ञों की निगरानी में रखा गया था। इसी दौरान नवजातों को परिजनों को सौंपते समय भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो गई। उन्होंने बताया कि जिस महिला को पुत्र हुआ था, उसे गलती से पुत्री सौंप दी गई और जिस महिला को पुत्री हुई थी, उसे पुत्र दे दिया गया। ऑपरेशन रिकॉर्ड, पीडियाट्रिशियन की रिपोर्ट, नर्सिंग रिकॉर्ड और पोर्टल पर दर्ज विवरण की जांच के बाद बच्चों की वास्तविक पहचान सुनिश्चित की गई।
दोषी कर्मचारियों पर कार्रवाई
प्राचार्य ने बताया कि मामले में एक आया और एक स्टाफ नर्स की लापरवाही सामने आई है। दोनों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है तथा भविष्य में उन्हें गायनी वार्ड में तैनात नहीं किया जाएगा। अस्पताल प्रशासन ने दोनों परिवारों को समझाकर नवजातों को उनके वास्तविक अभिभावकों को सौंप दिया है। साथ ही भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए नई व्यवस्था लागू की गई है, जिसके तहत नवजात शिशुओं को सीधे बाल रोग विशेषज्ञों की निगरानी में ही परिजनों को सौंपा जाएगा।












