RTI पर पर्दा डालने की कोशिश? ग्राम पंचायत नवकैशा में बिना पृष्ठ संख्या बताए मांगे ₹260, अपील का अधिकार भी नहीं बताया

RTI पर पर्दा डालने की कोशिश? ग्राम पंचायत नवकैशा में बिना पृष्ठ संख्या बताए मांगे ₹260, अपील का अधिकार भी नहीं बताया

“15वें वित्त आयोग के दस्तावेज मांगे तो मांगा शुल्क, लेकिन नहीं बताया कितने पन्ने; RTI नियमों के पालन पर उठे गंभीर सवाल”

जिला संवाददाता ताम्रध्वज साहू

बेमेतरा/साजा। सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत मांगी गई जानकारी को लेकर ग्राम पंचायत नवकैशा एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए बनाए गए RTI कानून की भावना के विपरीत कार्यवाही का आरोप लगाते हुए आवेदक ने गंभीर आपत्ति दर्ज की है।

जानकारी के अनुसार आवेदक द्वारा 19 मई 2026 को ग्राम पंचायत नवकैशा, जनपद पंचायत साजा में 15वें वित्त आयोग मद के अंतर्गत 1 जनवरी 2025 से आवेदन दिनांक तक के प्रस्ताव रजिस्टर, कैश बुक, ऑनलाइन कैश बुक तथा बिल-वाउचर की प्रमाणित प्रतियां उपलब्ध कराने हेतु सूचना का अधिकार आवेदन प्रस्तुत किया गया था।

आवेदक का आरोप है कि जन सूचना अधिकारी एवं पंचायत सचिव पंकज सिंह राजपूत द्वारा मांगी गई जानकारी उपलब्ध कराने के बजाय सीधे ₹260 जमा करने का पत्र जारी कर दिया गया, लेकिन हैरानी की बात यह है कि पत्र में यह कहीं उल्लेख नहीं किया गया कि कुल कितने पृष्ठों की प्रतियां उपलब्ध कराई जानी हैं और ₹260 की राशि किस गणना के आधार पर निर्धारित की गई है।

RTI अधिनियम के जानकारों का कहना है कि अतिरिक्त शुल्क मांगते समय संबंधित अधिकारी को पृष्ठ संख्या, प्रति पृष्ठ दर और शुल्क निर्धारण का स्पष्ट विवरण देना आवश्यक होता है। इसके बिना शुल्क मांगना आवेदक के सूचना प्राप्ति के अधिकार को प्रभावित करता है।

मामले का सबसे गंभीर पहलू यह बताया जा रहा है कि शुल्क मांगने वाले पत्र में प्रथम अपीलीय अधिकारी का नाम, पदनाम और पता तक अंकित नहीं किया गया। जबकि RTI अधिनियम के तहत आवेदक को यह बताना आवश्यक होता है कि यदि वह उत्तर से असंतुष्ट है तो किस अधिकारी के समक्ष अपील कर सकता है।

इस पूरे प्रकरण ने पंचायत स्तर पर सूचना अधिकार कानून के पालन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। चर्चा है कि क्या आवेदक को सूचना देने के बजाय प्रक्रिया को जटिल बनाकर जानकारी प्राप्त करने से हतोत्साहित करने का प्रयास किया जा रहा है?

अब आवेदक द्वारा इस मामले में प्रथम अपील दायर किए जाने की तैयारी की जा रही है। यदि अपीलीय स्तर पर भी संतोषजनक जवाब नहीं मिलता है तो मामला राज्य सूचना आयोग तक पहुंच सकता है। ऐसे में संबंधित अधिकारियों की कार्यप्रणाली और RTI कानून के पालन की स्थिति की भी जांच हो सकती है।

पारदर्शिता की बात करने वाली पंचायत व्यवस्था में यह मामला अब चर्चा का विषय बन गया है। लोगों का कहना है कि यदि सार्वजनिक धन से किए गए कार्यों के दस्तावेज मांगने पर भी स्पष्ट जानकारी नहीं दी जाती, तो जवाबदेही और पारदर्शिता के दावे कमजोर पड़ जाते हैं।

ये भी पढ़ें मुरूम माफियाओं पर मेहरबानी या सिस्टम की चुप्पी? परिवहन अनुमति की आड़ में जेसीबी से खुदाई, करोड़ों के अवैध खनन पर उठे सवाल

और पढ़ें

Cricket Live Score

Corona Virus

Rashifal

और पढ़ें