राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान, महरौनी (ललितपुर) में बड़े धूमधाम से मनाई गई विश्वकर्मा जयंती
महरौनी (ललितपुर)। राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान, महरौनी में आज विश्वकर्मा जयंती बड़े ही धूमधाम और उत्साह के साथ मनाई गई। इस अवसर पर संस्थान परिसर को रंग-बिरंगी सजावट, फूलों की मालाओं और दीपों से सजाया गया। विद्यार्थियों एवं प्रशिक्षकों ने भगवान विश्वकर्मा की प्रतिमा का पूजन-अर्चन कर तकनीकी शिक्षा एवं कौशल विकास की उन्नति के लिए आशीर्वाद प्राप्त किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ संस्थान के प्रधानाचार्य द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया। तत्पश्चात भगवान विश्वकर्मा की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित किए गए और वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच विशेष पूजन किया गया। प्रधानाचार्य ने अपने संबोधन में कहा कि भगवान विश्वकर्मा को सृष्टि का प्रथम अभियंता एवं वास्तुकार माना जाता है। उन्होंने संसार को विज्ञान, तकनीक और निर्माण की दिशा प्रदान की। तकनीकी शिक्षा प्राप्त कर रहे विद्यार्थियों को उनके आदर्शों पर चलकर राष्ट्र के निर्माण में अपनी भूमिका निभानी चाहिए।
इस मौके पर प्रशिक्षकों ने भी विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि आज के समय में कौशल और तकनीकी ज्ञान ही प्रगति की कुंजी है। औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों की स्थापना का उद्देश्य युवाओं को आत्मनिर्भर बनाना और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना है। विश्वकर्मा जयंती हमें यह प्रेरणा देती है कि हम परिश्रम, ईमानदारी और निष्ठा से अपने कौशल का उपयोग समाज व देश की सेवा में करें।
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने रंगोली प्रतियोगिता, वाद-विवाद और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी दीं। सभी गतिविधियों में छात्रों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। विजेताओं को सम्मानित कर उनके मनोबल को बढ़ाया गया।
अंत में संस्थान के प्रशिक्षक मंडल और विद्यार्थियों ने सामूहिक रूप से यह संकल्प लिया कि वे तकनीकी शिक्षा को और अधिक प्रभावशाली बनाने में अपना योगदान देंगे और प्रधानमंत्री के “आत्मनिर्भर भारत” के सपने को साकार करने में अग्रसर रहेंगे।
कार्यक्रम का सफल संचालन संस्थान के प्रशिक्षकों और विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी से हुआ। इस अवसर पर स्थानीय गणमान्य नागरिक भी उपस्थित रहे और उन्होंने विद्यार्थियों के प्रयासों की सराहना की।
इस प्रकार राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान, महरौनी (ललितपुर) में आयोजित विश्वकर्मा जयंती उत्सव यादगार बन गया, जिसने सभी को तकनीकी शिक्षा, परिश्रम और नवाचार के महत्व का दिया।
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