जलेसर तहसील में बढ़ती प्रशासनिक अव्यवस्था: तहसीलदार संदीप कुमार पर गंभीर आरोपों की जाँच शुरू
संवाददाता – योगेंद्र सिंह. जनपद एटा की जलेसर तहसील चलते हैं। यह तहसील पीतल की घंटियों और विविध अचारों के लिए प्रसिद्ध रही है, साथ ही मनोकामनाओं की पूर्ति हेतु विख्यात शनि मंदिर के कारण भी श्रद्धालुओं का केंद्र रही है।
लेकिन आजकल यह तहसील अपनी प्रशासनिक अक्षमता और विवादों के चलते चर्चा में है। कभी ऐसा प्रतीत होता है मानो इस पर शनिदेव की छाया पड़ गई हो, या फिर यह तहसील कुछ अधिकारियों की अदूरदर्शिता की शिकार हो गई है।
पिछले कुछ वर्षों में कई सक्षम अधिकारियों ने यहां उत्कृष्ट कार्य करके जनपद का नाम रोशन किया है, परंतु हाल के महीनों में जलेसर तहसील को लेकर स्थिति गंभीर होती जा रही है। विशेष रूप से पूर्व तहसीलदार संदीप कुमार के कार्यकाल को लेकर कर्मचारियों और बार एसोसिएशन में व्यापक असंतोष देखा गया।
विवादास्पद घटनाक्रम
एक विवादित वीडियो के वायरल होने के बाद स्थिति और भी जटिल हो गई। वीडियो में तहसील के नायब नाजिर पुष्पेंद्र सिंह द्वारा एक कर्मचारी को कथित गाली देते हुए देखा गया, जो एक तामीला प्रकरण से जुड़ा था। इस घटना को लेकर कर्मचारियों का कहना है कि मामला आपसी समन्वय से सुलझाया जा सकता था, परंतु इसे सोशल मीडिया पर प्रमुखता से प्रचारित किया गया, जिससे प्रशासन की गरिमा को ठेस पहुँची।
तहसीलदार संदीप कुमार पर लगे आरोप
तहसीलदार संदीप कुमार पर कई गंभीर आरोप सामने आए हैं, जिनमें से कुछ इस प्रकार हैं:
1. कर्मचारियों व अधिवक्ताओं के प्रति कठोर व्यवहार – पूर्व में अलीगंज तहसील में भी ऐसे ही आरोप सामने आ चुके हैं।
2. प्रक्षु लेखपालों की सेवा पुस्तिका से छेड़छाड़ – सेवा नियमों के उल्लंघन के आरोप।
3. सरकारी आदेशों की अवहेलना – न्यायिक मामलों में सिविल कोर्ट के अधिकार क्षेत्र में हस्तक्षेप।
4. भू-माफिया सूची से नाम हटाना – एक गंभीर प्रकरण में जिला प्रशासन के आदेश की अवहेलना का आरोप।
5. कर्मचारियों का उत्पीड़न – बिना आधार के आरोप लगाकर मानसिक दबाव बनाया जाना।
6. राजकोष को नुकसान – लगभग ₹50 करोड़ के नुकसान का अनुमान।
7. अनाधिकृत भर्ती – बिना अनुमति के नियुक्तियाँ करना।
8. सरकारी भूमि का निजीकरण – आरोप है कि बड़ी मात्रा में भूमि को गलत ढंग से निजी व्यक्तियों को सौंपा गया।
जाँच और कार्यवाही
इन सभी आरोपों के चलते जिलाधिकारी प्रेम रंजन सिंह के निर्देश पर अपर जिलाधिकारी सत्य प्रकाश ने तत्काल संज्ञान लेते हुए सघन जाँच कराई। मात्र सात घंटे में की गई इस जाँच के बाद तहसीलदार संदीप कुमार को तत्काल प्रभाव से जलेसर तहसील से हटाकर जिला मुख्यालय स्थित भू-अभिलेख विभाग में संबद्ध कर दिया गया है।
इसके अतिरिक्त नायब नाजिर पुष्पेंद्र सिंह के खिलाफ भी जांच के आदेश दिए गए हैं। जल्द ही इस मामले में प्रशासनिक कार्रवाई देखने को मिल सकती है।
निष्कर्ष
जलेसर तहसील में प्रशासनिक स्थिति जिस तरह बिगड़ी, वह केवल एक अधिकारी की भूमिका पर नहीं, बल्कि समूचे सिस्टम की जवाबदेही पर प्रश्नचिन्ह लगाता है। यह देखना अब आवश्यक होगा कि जिला प्रशासन इन जाँचों के बाद कितनी पारदर्शिता और निष्पक्षता से कार्यवाही करता है। जनता को उम्मीद है कि दोषी चाहे कोई भी हो, कानून और सेवा नियमावली के अंतर्गत उचित दंड दिया जाएगा।












