32वें रामायण मेला का अद्भुत नज़ारा, श्रृंगवेरपुर धाम भक्ति से सराबोर
रिपोर्टर: आलोक मिश्रा | विशेष संवाददाता
श्रृंगवेरपुर धाम, प्रयागराज: श्रृंगवेरपुर धाम में आयोजित 32वें क्षेत्रीय रामायण मेले में इस वर्ष भक्ति और श्रद्धा का अनोखा संगम देखने को मिला। पूरा धाम प्रभु श्रीराम की भक्ति से सराबोर नजर आया। मेले के चौथे दिन आयोजित भव्य कार्यक्रम में सदस्य विधान परिषद माननीय सुरेंद्र चौधरी जी की विशेष उपस्थिति ने कार्यक्रम में चार चांद लगा दिए।
कथा व्यास पूजनीय चक्र सुदर्शन पुरी जी महाराज अपने पावन मुखारविंद से प्रभु श्रीराम की लीलाओं का रसपान करा रहे हैं। उनके द्वारा कही गई प्रेरणादायक बातों ने श्रद्धालुओं के हृदय को भक्ति से भर दिया। महाराज श्री ने चतुर्थ दिवस की कथा में कहा कि – “हमें सदैव अपने माता-पिता का सम्मान करना चाहिए, क्योंकि माता-पिता ही सच्चे ईश्वर हैं।”
उन्होंने बताया कि मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम प्रतिदिन प्रातः उठकर अपने माता-पिता और गुरुजनों को प्रणाम करते थे। यह परंपरा आज के समाज के लिए एक अनुकरणीय उदाहरण है।
श्रद्धालुओं की उमड़ी भीड़
अलादादपुर पूरे गौतम, आनापुर, श्रृंगवेरपुर और आस-पास के क्षेत्रों से हजारों की संख्या में भक्त रोजाना कथा श्रवण के लिए पहुंच रहे हैं। हर दिन शाम को पूरा धाम “जय श्रीराम” के जयकारों से गूंज उठता है।
मेले में न केवल श्रद्धालु बल्कि युवा साथी, माताएँ और बहनें भी भारी संख्या में शामिल हो रही हैं। भक्ति संगीत, झांकियाँ और धार्मिक आयोजनों ने वातावरण को आध्यात्मिक बना दिया है।
पूरे क्षेत्र में चक्र सुदर्शन पुरी जी महाराज की कथा चर्चा का विषय बनी हुई है। भक्तजन कह रहे हैं कि महाराज जी की अमृतवाणी ने मेले की शोभा में चार चांद लगा दिए हैं।
— दैनिक चक्र धार्मिक डेस्क
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