“बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ”, “पढ़ेगा इंडिया बढ़ेगा इंडिया” नारा फेल/धराशाही जिम्मेदार कौन–जीपीए तीन चरणों में चयनित बच्चों का दाखिला ग्रीष्मकालीन अवकाश के बाद भी सुनिश्चित नहीं हो सका है
पवन सूर्यवंशी ब्यूरो चीफ़ ऑल एनसीआर


गाजियाबाद पेरेंट्स एसोसिएशन के बैनर तले अभिभावकों ने दी चेतावनी।अनिवार्य बाल शिक्षा अधिकार अधिनियम 2009 के तहत तीन चरणों में चयनित बच्चों का दाखिला ग्रीष्मकालीन अवकाश के बाद भी सुनिश्चित नहीं हो सका है। ग्रीष्मकालीन अवकाश से पूर्व ज्यादातर स्कूलों में परीक्षाएं संपन्न हो चुकी है लेकिन आरटीई चयनित बच्चों को निशुल्क शिक्षा का अधिकार दिलाने हेतु आरटीई अधिनयम का अनुपालन करने में जिला शिक्षा विभाग नाकाम साबित होता रहा है। बता दे सत्र 2026–27 में राइट टू एजुकेशन एक्ट के तहत 6086 दुर्बल आलाभीत वर्ग समूह बच्चों का चयन आरटीई प्रक्रिया द्वारा किया गया था। जिसमें 40 प्रतिशत बच्चे अभी भी शिक्षा के अधिकार से वंचित है, उनका दाखिला निजी स्कूलों द्वारा नहीं लिया गया है। पीड़ित अभिभावक निजी स्कूलों व शिक्षा विभाग के दफ्तरों के पांच माह से चक्कर काटने को हैं मजबूर।जीपीए सचिव अनिल सिंह व आरटीई प्रभारी धर्मेंद्र यादव ने बताया कि पूर्व में जैसा बताया गया था कि आरटीई चयनित बच्चों का दाखिला सुनिश्चित न होने की स्थिति में जीपीए के नेतृत्व में अभिभावाक बस भरकर लखनऊ मुख्यमंत्री दरबार के लिए कूच करेंगे, लेकिन शिक्षा विभाग द्वारा अतिरिक्त समय की मांग की गई क्योंकि स्कूलों में ग्रीष्मकालीन अवकाश था। एक जुलाई से ज्यादातर खुल गए हैं इसी क्रम में अनिल सिंह व अभिभावकों ने बेसिक शिक्षा अधिकारी से आज मुलाकात की जिस पर बीएसए द्वारा पांच दिन का समय लेते हुए बच्चों के दाखिले सुनिश्चित करवाने का आश्वासन दिया। जीपीए एग्जीक्यूटिव मेंबर नरेश कुमार कीर ने प्रश्नचिह्न लगाते हुए कहा एक तरफ प्रदेश सरकार “स्कूल चलो अभियान” के दुसरे चरण की शुरुआत करने जा रही है तो वहीं तीन चरणों में संपन्न हुई आरटीई प्रक्रिया में चयनित बच्चों का दाखिला ग्रीष्मकालीन अवकाश के बाद भी सुनिश्चित नहीं हो सका है। आरटीई के प्रति सरकार क्यों नहीं है गंभीर???आरटीई एक्ट का अनुपालन की जिम्मेदारी किसके पास??? जैसे प्रश्न चिन्ह लगाते हुए सूबे के मुख्यमंत्री योगी जी से मांग कि है कि जल्द आरटीई चयनित बच्चों का दाखिला सुनिश्चित कर शिक्षा का अधिकार दिलाया जाए। और आरटीई अधिनियम की अवहेलना व मनमानी करने वाले निजी स्कूलों पर कठोर दंडात्मक कार्रवाई करते हुए मान्यता प्रत्याहारन होनी चाहिए जिससे एक नज़ीर बने और आरटीई अधिनियम की अवहेलना न हो सके। अंत में जीपीए सचिव अनिल सिंह व अभिभावकों ने चेतावनी देते हुए कहा दिए गए समय पर अगर बच्चों के दाखिले सुनिश्चित नहीं होते तो निश्चित तौर पर अभिभावक बस बढ़कर लखनऊ के लिए कूच करेंगे जिसकी जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होगी। इस अवसर पर अनिल सिंह, नरेश कीर नवीन तँवर, राहुल,अनिल कुमार, संजय पाल, मोंटू, राजू, रेखा, पुष्पा, साहिल,धर्मेंद्र यादव, सहित काफी महिलाएं पुरुष मौजूद रहे।












