जनपद में सृजना साहित्यिक संस्था के द्वारा,राष्ट्रीय भाषाई संगोष्ठी हुई संपन्न।
संवाददाता करन कुमार विश्वकर्मा प्रतापगढ़ । आपको बता दे कि जनपद प्रतापगढ़ में सृजना साहित्यिक संस्था उत्तर प्रदेश के तत्वावधान में राष्ट्रीय भाषाई संगोष्ठी का आयोजन शारदा संगीत महाविद्यालय के सभागार में हुआ । इसके अलावा जिसमें तमिल, हिन्दी एवं अवधी भाषाओं का राष्ट्रीय एकता में योगदान विषय पर व्यापक चर्चा हुई। महाविद्यालय की छात्रा श्रेया तिवारी ने सरस्वती वंदना एवं स्वागत गीत प्रस्तुत किया।
इसके साथ ही आपको बताते चलें कि मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए चेन्नई तमिलनाडु से आई विभिन्न भाषाओं की ज्ञाता डॉ0 ए0 भवानी ने कहा कि भाषाएं एक-दूसरे को आत्मसात करती हैं। इससे राष्ट्रीय एकता व अखंडता प्रगाढ़ होती है। हमको सभी भाषाओं के साहित्य को अनूदित करके देश के भावात्मक सौहार्द को बढ़ाना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने जोर देकर कहा कि मुझे यहां आकर बहुत प्रसन्नता हुई है। मैं आपके स्वागत-सम्मान से अभिभूत हुई हूं।डॉ0 ए0 भवानी को तमिल-हिन्दी साहित्य गौरव राष्ट्रीय सम्मान से अलंकृत किया गया। इसके अलावा मुख्य वक्ता उत्तर-दक्षिण के भाषाओं के सेतु तमिल, हिन्दी एवं अवधी विद्वान डॉ0 एम0 गोविन्द राजन ने कहा कि भाषाओं में अनन्तता का गुण होता है। तमिल, अवधी तथा हिन्दी भाषाओं ने मानव-मानव को जोड़ा है। भाषाओं का विरोध राजनीतिक है।
देश के लोग एक हैं। इसके साथ ही अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ साहित्यकार भाषाविद डॉ0 दयाराम मौर्य ‘रत्न’ ने कहा कि तमिल महाकाव्य शिलापपधिकारम का अनुवाद करके मुझे तमिल भाषा के वृहद शब्द-भाव भण्डार का ज्ञान हुआ। इस भाषा में मुझे देवत्व की अनुभूति हुई।
संचालन चिंतक ट्रस्टी आनन्द मोहन ओझा ने किया। उक्त अवसर पर राधेश्याम दीवाना, श्रीनाथ मौर्य सरस, कुंज बिहारी लाल मौर्य काकाश्री, बीना श्रीवास्तव, सुनील कुमार सिंह, राजीव कुमार आर्य, राकेश कुमार कनौजिया, अशोक कुमार शर्मा, डॉ0 चन्द्रेश बहादुर सिंह ध्रुव, कल्पना तिवारी, कुलदीप सिंह इत्यादि उपस्थित रहें।
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