फर्जी पेट्रोल पंप डीलरशिप के नाम पर 32.45 लाख की साइबर ठगी, ग्वालियर से आरोपी गिरफ्तार

फर्जी पेट्रोल पंप डीलरशिप के नाम पर 32.45 लाख की साइबर ठगी, ग्वालियर से आरोपी गिरफ्तार

संवाददाता – अश्वनी कुमार

जिला – हाथरस हाथरस पुलिस ने पेट्रोल पंप डीलरशिप दिलाने के नाम पर की गई 32 लाख 45 हजार रुपये की साइबर ठगी का खुलासा करते हुए एक आरोपी को मध्य प्रदेश के ग्वालियर से गिरफ्तार किया है। आरोपी फर्जी वेबसाइट बनाकर लोगों को पेट्रोल पंप खुलवाने का झांसा देता था। सादाबाद क्षेत्र के गांव कुरसंडा निवासी अनिल कुमार ने साइबर क्राइम थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। पीड़ित के अनुसार, उन्होंने एक ऑनलाइन साइट ‘पेट्रोल पंप KSK डीलरशिप’ पर पेट्रोल पंप के लिए खाली भूमि संबंधी विज्ञापन देखा। आवेदन करने के बाद वेबसाइट संचालकों ने डीलरशिप देने के नाम पर अलग-अलग तारीखों में उनसे कुल 32 लाख 45 हजार रुपये अपने खातों में जमा करवा लिए।
बाद में अनिल कुमार जब मथुरा रिफाइनरी पहुंचे, तो उन्हें पता चला कि संबंधित वेबसाइट पूरी तरह फर्जी है और उनके साथ साइबर धोखाधड़ी की गई है। इसके बाद उन्होंने मामले की सूचना पुलिस को दी। शिकायत के आधार पर पुलिस ने जांच शुरू की। विवेचना के दौरान अमेरिका स्थित कंपनी godaddy.com से डोमेन से जुड़ी जानकारी जुटाई गई। साथ ही इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन से वेबसाइट https://petrolpimp-ksk.com की सत्यता की जांच कराई गई, जिसमें वेबसाइट और कंपनी दोनों को फर्जी पाया गया।
जांच में वेबसाइट का उपयोग करने और डोमेन खरीदने वाले व्यक्ति की पहचान छोटे राजा परिहार के रूप में हुई। आरोपी ग्राम गागौनी, थाना सिहोर, जिला शिवपुरी (मध्य प्रदेश) का निवासी है और वर्तमान में ग्वालियर के त्यागी नगर में रह रहा था। पुलिस ने उसे ग्वालियर से गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में आरोपी ने बताया कि उसने अपने अन्य साथियों के साथ मिलकर फर्जी जीमेल आईडी के जरिए godaddy.com पर नकली वेबसाइट बनाई थी। वेबसाइट पर भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड के नाम से फर्जी पेट्रोल पंप डीलरशिप का विज्ञापन डाला गया था। वेबसाइट खरीदने और संचालन के लिए उसने अपने नाम पर पंजीकृत मोबाइल नंबर का इस्तेमाल किया। आरोपी ने यह भी कबूल किया कि ठगी की रकम जिन खातों में डलवाई जाती थी, वे खाते और सिम कार्ड उसके अन्य साथी उपलब्ध कराते थे। इसके बदले में वह उन्हें ठगी की रकम का 10 प्रतिशत हिस्सा देता था, जबकि पैसे निकालने वाले साथियों को 20 प्रतिशत हिस्सा दिया जाता था।

फिलहाल पुलिस आरोपी के अन्य साथियों की तलाश में जुटी हुई है और साइबर ठगी नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही

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