पत्रकारिता को धर्म मानने वाले वरिष्ठ पत्रकार विष्णु त्रिपाठी का निधन, पत्रकार जगत में शोक की लहर
संवाददाता: पवन सूर्यवंशी कानपुर। पत्रकारिता को अपना धर्म मानने वाले, निर्भीक, निष्पक्ष और सिद्धांतनिष्ठ वरिष्ठ पत्रकार, लेखक व संपादक बाबू जी विष्णु त्रिपाठी (80) का सोमवार दोपहर एक निजी अस्पताल के आईसीयू में निधन हो गया। वे पिछले कई दिनों से जीवन-मृत्यु के संघर्ष में थे। उनके निधन से कानपुर सहित पूरे प्रदेश के पत्रकार जगत में शोक की लहर दौड़ गई है।
स्वर्गीय विष्णु त्रिपाठी जी का नाम बड़े सम्मान के साथ लिया जाता था। वे न केवल एक वरिष्ठ पत्रकार थे, बल्कि पीढ़ियों के लिए प्रेरणा स्रोत भी थे। पत्रकारिता के मूल्यों, सत्य और जनहित के प्रति उनकी प्रतिबद्धता उन्हें विशिष्ट बनाती थी।

उन्होंने नॉर्दर्न इंडिया से पत्रकारिता की शुरुआत की और इसके बाद विश्वमित्र, दैनिक जागरण (साहित्य संपादक), आज, स्वतंत्र भारत और अमर उजाला जैसे प्रतिष्ठित समाचार पत्रों में संपादकीय दायित्वों का निर्वहन किया। वे कानपुर प्रेस क्लब के तीन बार अध्यक्ष, यूपी वर्किंग जर्नलिस्ट यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष तथा उत्तर प्रदेश राज्य प्रेस मान्यता समिति के तीन बार सदस्य रहे।
हिंदी, उर्दू और अंग्रेजी भाषाओं पर समान पकड़ रखने वाले विष्णु त्रिपाठी जी ने कई महत्वपूर्ण पुस्तकों का लेखन और संपादन किया। उन्होंने
‘किस्सा कचहरी’, ‘बहती गंगा’, ‘बालकृष्ण शर्मा नवीन’, ‘मध्य उत्तर प्रदेश की पत्रकारिता का इतिहास’ जैसी पुस्तकों का लेखन किया तथा ‘पत्रकारिता प्रदीप प्रताप’ पुस्तक का संपादन और गणेश शंकर विद्यार्थी ग्रंथ के संपादन में निर्देशक की भूमिका निभाई।
वे गणेश शंकर विद्यार्थी के विचारों के प्रखर अनुयायी थे। प्रताप अख़बार के 100 वर्ष पूरे होने पर वर्ष 2013 में उन्होंने प्रताप शताब्दी समारोह समिति का गठन कर पूरे वर्ष देशभर में कार्यक्रमों की श्रृंखला चलाई, जिसमें देश के वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों ने भाग लिया।
विष्णु त्रिपाठी जी हमेशा युवा पत्रकारों को पढ़ते रहने, वैचारिक रूप से मजबूत बनने और ईमानदारी व निर्भीकता के साथ पत्रकारिता करने की सीख देते थे। उनका जीवन पत्रकारिता के मूल्यों का जीवंत उदाहरण था।
उनकी अंतिम यात्रा मंगलवार सुबह 10 बजे, पत्रकारपुरम, विकास नगर स्थित आवास से भैरव घाट के लिए निकलेगी, जहां उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।
उनका जाना पत्रकारिता जगत के लिए अपूरणीय क्षति है। भले ही वे आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी कलम, विचार और आदर्श सदैव पत्रकारों का मार्गदर्शन करते रहेंगे।
ईश्वर दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें।
ॐ शांति, ॐ शांति।












