आईजीआरएस शिकायतों में लापरवाही पर डीएम सख्तः- मैनपुरी में बोले- तीन दिन में सुधार न होने पर रुकेगा अधिकारियों का

आईजीआरएस शिकायतों में लापरवाही पर डीएम सख्तः- मैनपुरी में बोले- तीन दिन में सुधार न होने पर रुकेगा अधिकारियों का

मंडल संवाददाता अमित चौहान

मैनपुरी जिलाधिकारी डॉ. इंद्रमणि त्रिपाठी ने जन-शिकायतों के निस्तारण में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने आईजीआरएस पोर्टल पर प्राप्त शिकायतों की समीक्षा बैठक में स्पष्ट किया कि समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण निस्तारण में किसी भी प्रकार की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जिलाधिकारी ने चेतावनी दी कि जिन विभागों में लंबित शिकायतों का तीन दिन के भीतर गुणवत्तापूर्ण निस्तारण नहीं होगा, वहां संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी। ऐसे अधिकारियों को प्रतिकूल प्रविष्टि दी जाएगी और उनके वेतन आहरण पर भी रोक लगाई जाएगी। आईजीआरएस पोर्टल पर शिकायतों के निस्तारण में अपेक्षित प्रगति न मिलने पर जिलाधिकारी ने कई अधिकारियों को विशेष रूप से चेतावनी दी। इनमें अवर अभियंता मंडी परिषद, सहायक विकास अधिकारी (मैनपुरी, सुल्तानगंज, कुरावली), उप निबंधक किशनी, विपणन सहायक, एसीओ चकबंदी प्रथम एवं द्वितीय तथा एएमए जिला पंचायत शामिल हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि जन-समस्याओं का समयबद्ध समाधान प्रत्येक अधिकारी और कर्मचारी की व्यक्तिगत जिम्मेदारी है। इसमें किसी भी स्तर पर लापरवाही अक्षम्य होगी। जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि किसी भी विभाग की शिकायत डिफॉल्टर श्रेणी में नहीं पहुंचनी चाहिए। अधिकारियों को प्रतिदिन आईजीआरएस पोर्टल लॉगिन कर स्वयं लंबित मामलों की समीक्षा करनी होगी। जिलाधिकारी ने शिकायतों के निस्तारण में गुणवत्ता को सर्वोच्च प्राथमिकता बताया। उन्होंने कहा कि केवल औपचारिक आख्या अपलोड करना पर्याप्त नहीं है। प्रत्येक शिकायत का तथ्यों के आधार पर निष्पक्ष परीक्षण किया जाए और शिकायतकर्ता से बातचीत के बाद ही संतोषजनक आख्या पोर्टल पर अपलोड की जाए। बिना वास्तविक जांच और शिकायतकर्ता से संवाद के निस्तारण करने वाले अधिकारियों की जिम्मेदारी तय होगी। उन्होंने सभी विभागाध्यक्षों को नियमित रूप से लंबित शिकायतों की समीक्षा करने और निर्धारित समय-सीमा के भीतर उनका निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि समय-सीमा का उल्लंघन विभागीय कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न लगाता है, जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उनका मानना था कि व्यक्तिगत निगरानी से ही शिकायतों के निस्तारण की गुणवत्ता और गति में सुधार संभव है।

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