वो एक शहर।
वो एक शहर जहां रखा था कदम पहली बार
वो एक शहर जहां अजनबियों से भी पाया था मैंने प्यार।
वो एक शहर जहां पहली बार कदम रखते हुए मुझे लगा था डर। पर वहां कदम रखने के बाद ना जाने क्या था उस शहर में की मुझे लगा जैसे मां की गोद मिल गई। उस शहर ने पहले दिन से ही मुझे अजनबी होने का एहसास ना होने दिया। उस शहर ने खामोशी से मेरा हाथ थाम लिया। जब वहा की सुबह और वहां की शाम से मैं वाकिफ हुआ तो एहसास हुआ की वो शहर पराया नही अपना था। उस शहर में कुछ तो बात थी की वहा की सुबह हो या शाम कुछ भी खाली नहीं जाती थी। उस शहर में कुछ तो ऐसे दिन थे और कुछ ऐसी शाम जो सबसे अलग थी। वहां रह कर लगा था की मंजिल मिल गई। एक ठहराव था वहां की जिंदगी में। भीड़ थी पर लगती थी अपनी। जीने का दिल करता था हर पल ,उस शहर में कुछ ऐसी जिंदगी थी। वहां की बस्ती में मासूम से थे लोग। हर किसी को बस अपने काम से मतलब लेकिन मतलबी नही थे वो लोग। चाय की चुस्की के साथ दो मीठी मुस्कान भी बिखेर देते थे। कभी कोई बुजुर्ग भी बच्चों का हाल पूछ लेते थे। ऐसा था वो शहर। ऐसी थी वहां की जिंदगी। बस कुछ लफ़्ज़ मेरे उस प्यारे से शहर आजमगढ़ के नाम।
✍️आयशा अल ग़ज़ल
ये भी पढ़ें 08 अप्रैल 2025 , मंगलवार- आज का राशिफल












