“सड़क के ऊपर कचरा या कचरे के ऊपर सड़क?—वार्ड क्रमांक 15 में बदहाली की कहानी”
जिला संवाददाता ताम्रध्वज साहू
बेमेतरा नगर के वार्ड क्रमांक 15, नयापारा क्षेत्र में आंगनबाड़ी क्रमांक 2 के पास, पुराने साईं मंदिर के आसपास का दृश्य किसी भी जिम्मेदार प्रशासन के लिए शर्मिंदगी का कारण बन सकता है। यहां सड़क का हाल ऐसा हो चुका है कि यह समझ पाना मुश्किल है कि सड़क पर कचरा पड़ा है या कचरे के ऊपर ही सड़क बना दी गई है। स्थानीय लोगों के अनुसार, इस समस्या की जानकारी पार्षद और नगर पालिका अध्यक्ष दोनों को कई बार दी जा चुकी है, लेकिन इसके बावजूद हालात जस के तस बने हुए हैं। इस क्षेत्र में प्रवेश करते ही सबसे पहले जो चीज नजर आती है, वह है चारों ओर फैला कचरा—प्लास्टिक, सड़े-गले खाद्य पदार्थ, पॉलीथिन, कागज और घरेलू अपशिष्ट का अंबार। सड़क का अस्तित्व मानो इस कचरे के नीचे दब गया है। बारिश के दिनों में स्थिति और भी भयावह हो जाती है, जब यह कचरा सड़कर बदबू फैलाता है और कीचड़ के साथ मिलकर पूरे रास्ते को दलदल में बदल देता है।स्थानीय निवासी बताते हैं कि “हमने कई बार पार्षद और नगर पालिका में शिकायत की, लेकिन सिर्फ आश्वासन मिला, कार्रवाई नहीं,” एक स्थानीय बुजुर्ग ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा। यह समस्या सिर्फ गंदगी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह स्वास्थ्य के लिए भी गंभीर खतरा बन चुकी है। गंदगी के कारण मच्छरों और मक्खियों की संख्या में तेजी से वृद्धि हो रही है, जिससे डेंगू, मलेरिया और अन्य संक्रामक बीमारियों का खतरा बना रहता है। पास में स्थित आंगनबाड़ी केंद्र में आने वाले छोटे बच्चों के लिए यह स्थिति बेहद चिंताजनक है। बच्चों को रोजाना इसी गंदगी के बीच से होकर गुजरना पड़ता है, जिससे उनके स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। सड़क की हालत इतनी खराब हो चुकी है कि पैदल चलना भी मुश्किल हो गया है। कई जगहों पर कचरे के नीचे गड्ढे हैं, जिनमें पैर फंसने से लोग गिर जाते हैं और चोटिल हो जाते हैं। दोपहिया वाहन चालकों के लिए यह रास्ता जोखिम भरा साबित हो रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार वाहन फिसलने की घटनाएं भी हो चुकी हैं, लेकिन इसके बावजूद प्रशासन की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। सबसे बड़ी बात यह है कि यह क्षेत्र पूरी तरह से उपेक्षित नजर आता है, जबकि यह शहर के अंदर ही स्थित है। नगर पालिका द्वारा सफाई और स्वच्छता के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों की पोल खोल रही है। स्वच्छ भारत मिशन जैसे अभियानों की बात की जाती है, लेकिन इस वार्ड की स्थिति देखकर लगता है कि इन योजनाओं का यहां कोई प्रभाव नहीं पड़ा है।स्थानीय महिलाओं ने भी अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए बताया कि उन्हें रोजाना इस गंदगी के बीच से होकर गुजरना पड़ता है। “बच्चों को स्कूल भेजना हो या खुद बाजार जाना हो, हर बार यही रास्ता पार करना पड़ता है। बदबू इतनी ज्यादा होती है कि सांस लेना मुश्किल हो जाता है,” अब सवाल यह उठता है कि जब इस समस्या की जानकारी जनप्रतिनिधियों और प्रशासन को है, तो आखिर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही? क्या किसी बड़े हादसे या बीमारी फैलने का इंतजार किया जा रहा है? स्थानीय लोगों का धैर्य अब जवाब देने लगा है और वे जल्द से जल्द इस समस्या के समाधान की मांग कर रहे हैं यदि समय रहते इस ओर ध्यान नहीं दिया गया, तो यह समस्या और भी विकराल रूप ले सकती है। प्रशासन को चाहिए कि वह तत्काल संज्ञान लेकर सफाई अभियान चलाए और इस क्षेत्र को स्वच्छ एवं सुरक्षित बनाए। साथ ही, जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों की जवाबदेही तय की जाए, ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा उत्पन्न न हो। वार्ड क्रमांक 15 की यह तस्वीर न केवल स्थानीय प्रशासन की लापरवाही को उजागर करती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि विकास और स्वच्छता के दावों के बीच जमीनी हकीकत कितनी अलग है। अब देखना यह है कि संबंधित अधिकारी इस समस्या को कितनी गंभीरता से लेते हैं और कब तक इस बदहाल सड़क को कचरे से मुक्त कर पाते हैं।











