ग़म ज़दा है फ़साना मेरा

ग़म ज़दा है फ़साना मेरा

जल चुका है ठिकाना मेरा

उनसे ऐसी ना उम्मीद थी

लूट लेंगे खज़ाना मेरा

इस जहां को गवारा न था

उनके घर आना जाना मेरा

बाद रोता है खोने के क्यूँ

तब क्यूँ कहना ना माना मेरा

ये जो तिरया किसी की नहीं

मुझसे कहता था नाना मेरा

अब मिलेंगे कबीरा नहीं

जग रहेगा दिवाना मेरा

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