बेमेतरा में अवैध गांजा और शराब का फैलता कारोबार—प्रशासन की नाकामी या संगठित नेटवर्क का दबदबा?

बेमेतरा में अवैध गांजा और शराब का फैलता कारोबार—प्रशासन की नाकामी या संगठित नेटवर्क का दबदबा?

संवाददाता ताम्रध्वज साहू

छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले में इन दिनों अवैध गांजा और शराब का कारोबार तेजी से फल-फूल रहा है। यह केवल कानून-व्यवस्था की समस्या नहीं रह गई है, बल्कि सामाजिक और आर्थिक ताने-बाने को भी प्रभावित कर रही है। गांव से लेकर शहर तक, हर स्तर पर इस अवैध गतिविधि की चर्चा है, लेकिन इसके बावजूद पुलिस विभाग और आबकारी विभाग की कार्यवाही अपेक्षित परिणाम नहीं दे पा रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जिले के कई इलाकों में खुलेआम गांजा बेचा जा रहा है। खासकर स्कूल-कॉलेजों के आसपास और ग्रामीण क्षेत्रों में युवाओं को आसानी से नशीले पदार्थ उपलब्ध हो रहे हैं। इससे नई पीढ़ी नशे की गिरफ्त में आ रही है, जो समाज के लिए एक गंभीर चेतावनी है। ग्रामीणों के अनुसार, कई बार शिकायत करने के बावजूद भी कार्रवाई केवल दिखावे तक सीमित रह जाती है। अवैध शराब का कारोबार भी उतनी ही तेजी से फैल रहा है। सरकारी दुकानों के अलावा अवैध तरीके से शराब का निर्माण और बिक्री बड़े पैमाने पर हो रही है। गांवों में महुआ शराब और अन्य देसी शराब का उत्पादन धड़ल्ले से चल रहा है। यह न केवल सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचा रहा है, बल्कि लोगों के स्वास्थ्य के लिए भी खतरनाक साबित हो रहा है। कई मामलों में जहरीली शराब से लोगों की मौत तक हो चुकी है, लेकिन इसके बावजूद अवैध धंधा बंद नहीं हो पा रहा है। प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि पुलिस और आबकारी विभाग के कुछ अधिकारी इस अवैध कारोबार पर सख्ती दिखाने के बजाय आंख मूंदे बैठे हैं। कुछ लोग यह भी आरोप लगाते हैं कि इस धंधे में संलिप्त लोगों और अधिकारियों के बीच सांठगांठ हो सकती है, जिसके चलते कार्रवाई प्रभावी नहीं हो पा रही है। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन लगातार बढ़ती घटनाएं संदेह को मजबूत करती हैं। एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि यह अवैध कारोबार संगठित रूप ले चुका है। बाहर से गांजा की सप्लाई हो रही है और जिले के अंदर छोटे-छोटे नेटवर्क बनाकर इसे बेचा जा रहा है। इसमें स्थानीय युवाओं को भी शामिल किया जा रहा है, जिन्हें जल्दी पैसे कमाने का लालच दिया जाता है। इससे अपराध का स्तर भी बढ़ रहा है, क्योंकि नशे की लत कई बार चोरी, लूट और हिंसा जैसी घटनाओं को जन्म देती है। आबकारी विभाग की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। विभाग का मुख्य काम शराब की बिक्री और नियंत्रण पर नजर रखना है, लेकिन जमीनी हकीकत इसके विपरीत दिखाई देती है। अवैध शराब की भट्टियां खुलेआम चल रही हैं, और उन पर समय रहते कार्रवाई नहीं हो रही। कभी-कभार छापेमारी की खबरें जरूर आती हैं, लेकिन उनका असर लंबे समय तक नहीं दिखता। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल छापेमारी से समस्या का समाधान नहीं होगा। इसके लिए एक समग्र रणनीति की जरूरत है, जिसमें जागरूकता अभियान, सख्त निगरानी, और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई शामिल हो। साथ ही, युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए शिक्षा और रोजगार के अवसर भी बढ़ाने होंगे। इस मुद्दे पर राजनीतिक प्रतिक्रिया भी देखने को मिल रही है। विपक्षी दल प्रशासन की नाकामी को लेकर सरकार पर निशाना साध रहे हैं, जबकि सत्तारूढ़ पक्ष का कहना है कि अवैध गतिविधियों पर लगातार कार्रवाई की जा रही है और स्थिति नियंत्रण में है। लेकिन जमीनी स्तर पर जो हालात हैं, वे इस दावे को पूरी तरह सही नहीं ठहराते। बेमेतरा जिले के लिए यह समय एक चेतावनी की तरह है। अगर अभी ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले समय में यह समस्या और विकराल रूप ले सकती है। जरूरत है कि पुलिस और आबकारी विभाग मिलकर ईमानदारी से काम करें और इस अवैध नेटवर्क को जड़ से खत्म करें। अंततः, यह केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि समाज को भी आगे आना होगा। लोगों को जागरूक होकर इस तरह की गतिविधियों के खिलाफ आवाज उठानी होगी और युवाओं को सही दिशा दिखानी होगी। तभी बेमेतरा को इस नशे के जाल से मुक्त किया जा सकेगा।

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