भारतीय सेना ने युद्ध के बदलते स्वरूप को देखते हुए एक नई बटालियन तैयार की है काल, नाम (भैरव)

भारतीय सेना ने युद्ध के बदलते स्वरूप को देखते हुए एक नई बटालियन तैयार की है काल, नाम (भैरव)

संवाददाता पवन सूर्यवंशी एनसीआर

जिसका नाम रखा है ‘भैरव’। भैरव का मतलब होता है जिसको ना डर हो ना पश्चाताप हो। इसी बात को ध्यान में रखकर भैरव बटालियन बनी है। भैरव भगवान शिव के रौद्र रूप का प्रतीक है।इसका नाम भगवान शिव के रौद्र रूप ‘भैरव’ पर रखा गया है. जो दुश्मनों के लिए काल माने जाते हैं। इसके प्रतीक पर लिखा है कि अदृश्य और अदम्य। यह बटालियन चीन और पाकिस्तान से लगी सीमाओं के साथ-साथ देश के भीतर किसी भी ऑपरेशन को अंजाम देने के लिए पूरी तरह सक्षम है। 250 सैनिकों की इस टुकड़ी में इंफेंट्री, आर्टिलरी, एयर डिफेंस, सिग्नल और अन्य सपोर्ट यूनिट्स के जवान शामिल हैं।

क्यों पड़ी भैरव बटालियन की जरूरत?

बता दें कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद इंडियन आर्मी को एक ऐसी यूनिट की जरूरत महसूस हुई जो, दुश्मन की सीमा में गहराई तक घुसकर कार्रवाई कर सके। आतंकी लॉन्च पैड और फॉरवर्ड पोस्ट को नष्ट कर सके, इसी जरूरत ने भैरव बटालियन को जन्म दिया।जैसा कि आप जानते हैं स्पेशल फोर्सज स्ट्रैटेजिक ऑपरेशन के लिए होती है और साथ में जो घातक होती है वह टैक्टिकल ऑपरेशन में काम करती है। इन दोनों के बीच का जो गैप है उसके लिए भैरव का निर्माण किया गया है। यह यूनिट इन्फेंट्री बटालियन के घातक कमांडो और स्पेशल फोर्सेज (पैरा-SF) के बीच की रणनीतिक कड़ी के रूप में काम करेगी। इसका उद्देश्य आर्मी को और अधिक लीन, फुर्तीली और घातक बनाना है।इंडियन आर्मी भारत कभी ना पीछे है और ना पीछे कभी रहेगा ऐसे ऐसे प्रशिक्षण चलते रहेंगे दुश्मनों के हौसलों को नमस्ते नाबुत करने के लिए

दुश्मनों के कल को जन्म दिया है भारतीय सेना ने हर ऑपरेशन के लिए होंगे सक्षम।

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