कड़ाके की ठंड और घने कोहरे में दिल्ली की सड़कों पर जद्दोजहद, खुले आसमान के नीचे कट रही ज़िंदगियां
दिल्ली-एनसीआर इस समय भीषण ठंड और घने कोहरे की गिरफ्त में है। तापमान लगातार गिर रहा है और सुबह-शाम छाया रहने वाला कोहरा आम जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर रहा है। ऐसे हालात में जहां लोग अपने घरों में हीटर और रज़ाइयों का सहारा ले रहे हैं, वहीं राजधानी की सड़कों, फुटपाथों और फ्लाईओवर के नीचे रहने वाले बेघर लोग खुले आसमान के नीचे ठिठुरती रातें गुजारने को मजबूर हैं।
घने कोहरे और कड़ाके की ठंड के बीच दैनिक चक्र की टीम ने दिल्ली के विभिन्न इलाकों का दौरा किया। इस दौरान सड़कों पर इंसानियत की जद्दोजहद साफ दिखाई दी। कहीं बस स्टॉप के पास लोग अखबार, प्लास्टिक और पुराने कपड़ों में खुद को लपेटे बैठे दिखे, तो कहीं फुटपाथों पर छोटे-छोटे अलाव जलाकर ठंड से बचने की कोशिश की जा रही थी। कई परिवार, महिलाएं और छोटे बच्चे भी इन हालात में रात काटने को मजबूर हैं।
बेघर लोगों का कहना है कि ठंड के इस मौसम में रात सबसे ज्यादा भारी पड़ती है। कोहरा इतना घना होता है कि सांस लेना तक मुश्किल हो जाता है। कई लोग बीमार हो चुके हैं, लेकिन इलाज और दवाइयों तक पहुंच उनके लिए आसान नहीं है। सरकारी रैन बसेरों की संख्या सीमित होने के कारण सभी जरूरतमंदों को वहां जगह नहीं मिल पाती, जिससे बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर ही रात गुजार रहे हैं।
सामाजिक संगठनों और स्वयंसेवी संस्थाओं द्वारा कंबल और गर्म कपड़े बांटे जा रहे हैं, लेकिन जरूरत के मुकाबले यह मदद नाकाफी नजर आती है। ठंड का यह प्रकोप न सिर्फ आम लोगों के लिए परेशानी बना है, बल्कि उन लोगों के लिए जानलेवा साबित हो सकता है जिनके पास सिर छुपाने की जगह तक नहीं है।
दिल्ली की ये सर्द रातें सिर्फ मौसम की कहानी नहीं कहतीं, बल्कि समाज के उस सच को भी उजागर करती हैं, जहां विकास की चमक-दमक के बीच कुछ ज़िंदगियां आज भी खुले आसमान के नीचे ठंड से लड़ रही हैं। जरूरत है कि प्रशासन के साथ-साथ समाज भी आगे आए, ताकि इन बेघर लोगों को ठंड से बचाने के लिए ठोस और त्वरित कदम उठाए जा सकें।
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