बिहार: स्वास्थ्य शिविर में चिकित्सा नदारद, केवल खानापूर्ति तक सीमित कार्यक्रम

स्वास्थ्य शिविर में चिकित्सा नदारद, केवल खानापूर्ति तक सीमित कार्यक्रम

संवाददाता – प्रताप सिंह: जमुई।‌ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 75वें जन्मदिवस के उपलक्ष्य में केंद्र और राज्य सरकार के निर्देशानुसार महिला स्वास्थ्य जागरूकता एवं आवश्यक जांच हेतु आयोजित स्वास्थ्य शिविरों की हकीकत जमुई जिले में सवालों के घेरे में है।

सिकंदरा प्रखंड के महादेव सिमरिया पंचायत स्थित अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में चल रहे स्वास्थ्य शिविर में न तो महिला चिकित्सक उपलब्ध हैं और न ही पुरुष चिकित्सक। केवल महिला स्वास्थ्य कर्मी और डेटा ऑपरेटर की मौजूदगी में शिविर महज़ खानापूर्ति बनकर रह गया है।

स्थानीय महिलाओं ने बताया कि डॉक्टरों की अनुपस्थिति के कारण न तो सही जांच हो पा रही है और न ही आवश्यक परामर्श मिल रहा है। स्वास्थ्य प्रबंधक से पूछने पर उनका कहना था कि डॉक्टर नाइट ड्यूटी में थे, इसलिए अस्पताल नहीं आ पाए। वहीं, नियुक्त चिकित्सक डॉ. प्रेम कुमार अपने निजी क्लीनिक (लखीसराय रोड, सिकंदरा) में सेवाएँ देते देखे गए। इससे स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली और जिम्मेदारी पर गंभीर प्रश्न खड़े होते हैं।

महिला स्वास्थ्य कर्मी ने भी माना कि शिविर केवल औपचारिकता भर है। मरीजों के नाम व आधार कार्ड लेकर ऑनलाइन एंट्री कर दी जाती है और इसे ही सफलता का पैमाना बताया जाता है।

ऐसे में सवाल उठता है कि जब सरकारी चिकित्सक अपनी ड्यूटी निभाने के बजाय निजी क्लीनिक चला रहे हैं और स्वास्थ्य शिविर महज़ कागज़ी कार्रवाई तक सीमित हैं, तो महिलाओं के स्वास्थ्य सुधार के नाम पर चल रही योजनाओं का वास्तविक लाभ जनता तक कैसे पहुँचेगा?

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