तहसील प्रशासन और खनिज विभाग की कार्यशैली पर सवाल, शिकायत के बाद भी धड़ल्ले से चल रहे अवैध ईंट भट्ठे

तहसील प्रशासन और खनिज विभाग की कार्यशैली पर सवाल, शिकायत के बाद भी धड़ल्ले से चल रहे अवैध ईंट भट्ठे

शिवसेना जिला प्रभारी की लिखित शिकायत को महीनों बीते, न तहसीलदार ने दिखाई सख्ती न खनिज विभाग ने की ठोस कार्रवाई

जिला संवाददाता ताम्रध्वज साहू

बेमेतरा। साजा क्षेत्र में संचालित कथित अवैध ईंट भट्ठों को लेकर तहसील प्रशासन और खनिज विभाग दोनों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। लगभग दो-तीन माह पूर्व शिवसेना दुर्ग संभाग कार्यकारिणी सदस्य एवं जिला प्रभारी मनीष वर्मा द्वारा तहसीलदार साजा को लिखित शिकायत सौंपकर क्षेत्र में बिना अनुमति संचालित ईंट भट्ठों की जांच और कार्रवाई की मांग की गई थी, लेकिन आज तक कोई व्यापक और प्रभावी कार्रवाई सामने नहीं आई है। आरोप है कि क्षेत्र में कई ईंट भट्ठे आवश्यक अनुमति, खनिज स्वीकृति, राजस्व अनुमति तथा अन्य वैधानिक दस्तावेजों के बिना संचालित हो रहे हैं। शिकायत के बाद भी न तो तहसील प्रशासन ने व्यापक जांच अभियान चलाया और न ही खनिज विभाग ने अवैध उत्खनन एवं खनिज नियमों के उल्लंघन को लेकर कोई बड़ी कार्रवाई की।

शिकायत फाइलों में दबी या जिम्मेदार मौन?

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि शिकायत के आधार पर निष्पक्ष जांच की जाती तो क्षेत्र में संचालित अवैध भट्ठों की वास्तविक स्थिति सामने आ सकती थी। लेकिन महीनों बीत जाने के बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है। इससे यह धारणा बन रही है कि जिम्मेदार विभाग केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित हैं।

तहसीलदार और खनिज विभाग दोनों पर उठ रहे सवाल शिकायत मिलने के बाद तहसील प्रशासन ने कितने भट्ठों का निरीक्षण किया?कितने संचालकों से वैध अनुमति और दस्तावेज मांगे गए? खनिज विभाग ने अवैध मिट्टी उत्खनन और रॉयल्टी संबंधी जांच क्यों नहीं की? यदि जांच हुई तो उसकी रिपोर्ट सार्वजनिक क्यों नहीं की गई?कार्रवाई केवल चुनिंदा मामलों तक सीमित क्यों दिखाई देती है?

जनता की मांग – संयुक्त जांच हो

क्षेत्रवासियों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि तहसील प्रशासन, खनिज विभाग, राजस्व विभाग और प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े अधिकारियों की संयुक्त टीम बनाकर सभी ईंट भट्ठों की जांच कराई जाए तथा दोषी पाए जाने वालों पर कठोर कार्रवाई की जाए। “जब शिकायत लिखित रूप में दी गई, आरोप सार्वजनिक हैं और अवैध संचालन की चर्चाएं आम हैं, तो फिर तहसीलदार साजा और खनिज विभाग आखिर किस बात का इंतजार कर रहे हैं? कार्रवाई होगी या अवैध भट्ठों की चिमनियां यूं ही धुआं उगलती रहेंगी?”

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