बरसात में जलभराव से जूझ रहे ग्रामीण, मरीजों को गोद में उठाकर ले जाना पड़ता है अस्पताल

उमरापट्टी में पक्की सड़क का इंतज़ार

बरसात में जलभराव से जूझ रहे ग्रामीण, मरीजों को गोद में उठाकर ले जाना पड़ता है अस्पताल

बाघराय/प्रतापगढ़। विकासखंड बिहार के ग्राम सभा उमरापट्टी के पूरे ठाकुरैनी पुरवा के लोग पिछले कई वर्षों से पक्की सड़क के लिए तरस रहे हैं। गाँव के रिहायशी इलाके तक पहुँचने के लिए महज़ 100 मीटर का रास्ता है, लेकिन उसके पक्का न होने से हर बरसात में ग्रामीणों की मुश्किलें कई गुना बढ़ जाती हैं।

गाँव में एक दर्जन से अधिक परिवार रहते हैं। व्यापारी, नौकरीपेशा लोग, स्कूली बच्चे—सभी को इसी कच्चे रास्ते से होकर गुजरना पड़ता है। बरसात होते ही यह रास्ता पूरी तरह जलमग्न हो जाता है। कीचड़ और फिसलन के कारण पैदल चलना तक मुश्किल हो जाता है। ग्रामीणों ने कई बार खुद पैसे इकट्ठा कर मिट्टी और ईंट के टुकड़े डालकर रास्ता सुधारा, लेकिन बारिश का पानी भरते ही सब व्यर्थ हो जाता है।

स्थानीय निवासी श्रीकांत पांडेय बताते हैं कि उनकी बुजुर्ग मां बीमार पड़ीं तो एंबुलेंस तक पहुँचाना नामुमकिन हो गया। मजबूरी में उन्हें गोद में उठाकर मुख्य सड़क तक ले जाना पड़ा। यही हालात हर बरसात में किसी न किसी परिवार को झेलने पड़ते हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि ग्राम प्रधान बृजेश ने मार्ग निर्माण का आश्वासन तो दिया था, लेकिन पाँच साल बीत जाने के बाद भी पक्की सड़क नहीं बन पाई। खेतों से घिरे इस रास्ते पर पानी जमने से परेशानी और बढ़ जाती है।

गाँव वालों ने जिला प्रशासन से गुहार लगाई है कि जल्द से जल्द 100 मीटर पक्के मार्ग का निर्माण कराया जाए, ताकि रोजमर्रा के जीवन और आपातकालीन स्थितियों में लोगों को राहत मिल सके।

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