सैफई विवि दुष्कर्म कांड: गर्भपात पर निचली अदालत ने जताई असमर्थता, हाईकोर्ट में मांगी जाएगी अनुमति

सैफई विवि दुष्कर्म कांड: गर्भपात पर निचली अदालत ने जताई असमर्थता, हाईकोर्ट में मांगी जाएगी अनुमति 

संवाददाता पंकज मिश्रा

सैफई। उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय सैफई के मानसिक रोग विभाग में भर्ती मानसिक मंदित महिला से जुड़े बहुचर्चित दुष्कर्म प्रकरण में नया कानूनी मोड़ आ गया है। पीड़िता के गर्भपात की अनुमति को लेकर पुलिस द्वारा प्रस्तुत प्रार्थना पत्र पर इटावा सिविल जज सीनियर डिवीजन न्यायालय ने सुनवाई करने में असमर्थता जताते हुए मामला उच्च न्यायालय के समक्ष रखने की बात कही है। मामले की विवेचना कर रहे प्रभारी निरीक्षक भूपेंद्र राठी और विश्वविद्यालय प्रशासन अब संयुक्त रूप से आगे की प्रक्रिया पूरी कर इलाहाबाद उच्च न्यायालय में अनुमति के लिए प्रार्थना पत्र प्रस्तुत करेंगे। पुलिस की ओर से दाखिल प्रार्थना पत्र में पीड़िता की चिकित्सकीय स्थिति, मानसिक अवस्था और विश्वविद्यालय द्वारा गठित मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट को आधार बनाया गया है। मेडिकल परीक्षण में पीड़िता करीब 16 सप्ताह से अधिक गर्भवती पाई गई है। विशेषज्ञों के अनुसार नियमानुसार 20 सप्ताह तक गर्भपात संभव है, लेकिन ऐसे मामलों में न्यायालय की अनुमति आवश्यक होती है। इस प्रकरण में विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा गठित तीन समितियों की रिपोर्ट महत्वपूर्ण मानी जा रही है। डीन प्रोफेसर डॉ. आदेश कुमार की अध्यक्षता में गठित 9 सदस्यीय जांच समिति ने विभागाध्यक्ष प्रोफेसर ए.के. मिश्रा सहित वार्ड में तैनात 14 स्टाफ और सफाई कंपनी की लापरवाही चिन्हित की थी। इसके बाद कार्यपरिषद की बैठक में रिपोर्ट प्रस्तुत कर विभागीय कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की गई। वहीं पीड़िता के स्वास्थ्य परीक्षण के लिए मुख्य चिकित्सा अधीक्षक प्रोफेसर डॉ. एसपी सिंह की निगरानी में गठित मेडिकल बोर्ड, जिसकी अध्यक्षता गायनी विभागाध्यक्ष प्रोफेसर डॉ. कल्पना ने की, ने अपनी रिपोर्ट में पीड़िता को करीब 16 सप्ताह 5 दिन की गर्भवती बताया। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि पीड़िता की मानसिक स्थिति ऐसी नहीं है कि वह स्वयं बच्चे की देखभाल कर सके, इसलिए न्यायालय की अनुमति के बाद गर्भपात कराया जाना उपयुक्त हो सकता है। गौरतलब है कि मानसिक रोग विभाग में 14 जून 2025 को करीब 38 वर्षीय अज्ञात महिला को भर्ती कराया गया था। 17 मार्च 2026 को रूटीन जांच के दौरान उसके गर्भवती होने की पुष्टि हुई, जिसके बाद मामला सामने आया। इसके बाद मानसिक रोग विभागाध्यक्ष प्रोफेसर डॉ. अरुण कुमार मिश्रा ने थाना सैफई में मुकदमा दर्ज कराया। मामले में सफाई कर्मी रविंद्र कुमार बाल्मीकि निवासी लखना, थाना बकेवर, जनपद इटावा को नामजद किया गया। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।
पीड़िता और आरोपी के डीएनए नमूने जांच के लिए भेजे गए हैं तथा न्यायालय में पीड़िता के बयान भी दर्ज कराए जा चुके हैं। विश्वविद्यालय के कुलसचिव दीपक वर्मा ने बताया कि पीड़िता के स्वास्थ्य परीक्षण सहित सभी आवश्यक चिकित्सकीय प्रक्रियाएं पूरी कर ली गई हैं और संबंधित रिपोर्ट विवेचना अधिकारी को उपलब्ध करा दी गई है। प्रभारी निरीक्षक भूपेंद्र राठी ने बताया कि निचली अदालत ने मामले को उच्च न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करने की आवश्यकता बताई है। अब विधिक प्रक्रिया के तहत उच्च न्यायालय में प्रार्थना पत्र प्रस्तुत कर आगे की अनुमति प्राप्त की जाएगी।

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