गर्भपात शिकायत पर सील अस्पताल को बिना पंजीकरण फिर खोलने का आरोप, प्रसूता की मौत के बाद मचा हड़कंप।
संवादाता अमन अहमद। एटा जिले में स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। गर्भपात कराने और पंजीकरण न होने की शिकायत पर सील किया गया RN हॉस्पिटल, कथित रूप से बिना रजिस्ट्रेशन के ही दोबारा खोल दिया गया। इसी अस्पताल में इलाज के दौरान एक प्रसूता की मौत हो जाने से पूरे मामले ने तूल पकड़ लिया है। घटना के बाद RN हॉस्पिटल का स्टाफ मौके से फरार हो गया, जबकि पीड़ित परिजनों ने अस्पताल संचालक पर गंभीर आरोप लगाए हैं
जानकारी के अनुसार 7 नवंबर को स्वास्थ्य विभाग ने गर्भपात कराने और अस्पताल का पंजीकरण न होने की शिकायत पर RN हॉस्पिटल को सील किया था। इसके बावजूद करीब 15 दिन पूर्व स्वास्थ्य विभाग ने बिना रजिस्ट्रेशन के ही अस्पताल खोलने की अनुमति दे दी। गंभीर हालत में प्रसूता को RN हॉस्पिटल से ठंडी सड़क स्थित राधा बल्लभ हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) एटा ने बताया कि DNC और हॉस्पिटल के अवैध होने की शिकायत पर इसे बंद किया गया था, जबकि सपथपत्र के आधार पर RN हॉस्पिटल को खोला गया। लेकिन सवाल यह उठ रहा है कि जब अस्पताल का पंजीकरण ही नहीं था, तो उसे खोलने की अनुमति क्यों दी गई? इसके साथ ही यह आशंका भी जताई जा रही है कि गर्भपात जैसी गंभीर शिकायत के बाद क्या मोटी रकम लेकर अस्पताल खोला गया।
आरोप है कि झोलाछाप के नोडल डॉक्टर सुधीर मोहन और लोकमन ने पहले अस्पताल सील किया और फिर कागजी कार्रवाई में खेल कर उसे खुलवा दिया। अब तक किसी ठोस कार्रवाई न होने से स्वास्थ्य विभाग की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।












