शिव भक्ति में डूबी रामगंज की धरती, परिवहन मंत्री ने किया मंदिर अनावरण – अवधी कवि सम्मेलन और भजन संध्या ने बांधा समां
अमित तिवारी (राष्ट्रीय संवाददाता). प्रतापगढ़ जनपद का पर्वतपुर रामगंज बाजार रविवार को एक ऐतिहासिक और आध्यात्मिक पल का साक्षी बना, जब यहाँ स्थित प्राचीन शिव मंदिर के नवीनीकरण एवं शिलापट्ट अनावरण का भव्य कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस पावन अवसर पर उत्तर प्रदेश सरकार के परिवहन मंत्री श्री दयाशंकर सिंह स्वयं उपस्थित हुए। जैसे ही मंत्री जी मंदिर प्रांगण में पहुँचे, पूरे क्षेत्र में उल्लास और भक्ति का अद्भुत वातावरण बन गया। स्थानीय लोगों ने फूल-मालाओं और जयघोष से उनका भव्य स्वागत किया।
मंत्री जी ने अपने ओजस्वी भाषण में कहा, “शिव ही कल्याण हैं, शिव ही सृजन हैं। ऐसे दिव्य स्थलों का विकास केवल धार्मिक नहीं, सांस्कृतिक उत्थान का माध्यम भी है।” उन्होंने क्षेत्र के विकास और धार्मिक स्थलों के संरक्षण की दिशा में राज्य सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया।
इस पूरे कार्यक्रम की भव्य व्यवस्था खुशहाली फाउंडेशन, दिल्ली के तत्वावधान में की गई थी। संस्था के अध्यक्ष श्री सोनू सिंह की नेतृत्व क्षमता और सेवा भावना की सभी ने सराहना की। उनके साथ डॉ. प्रभांशु ओझा (प्रोफेसर), अधिवक्ता वैभव पांडे एवं अधिवक्ता पुष्पेश पांडे ने भी आयोजन में सक्रिय सहभागिता निभाई। मीडिया प्रतिनिधि रविन्द्र दुबे ने कार्यक्रम की हर एक झलक को जनता तक पहुँचाने में अहम भूमिका निभाई।
कार्यक्रम की खास बात रही — अवधी कवि सम्मेलन और भजन संध्या, जिसने उपस्थित जनसमूह को भावविभोर कर दिया। लोकगीतों की मिठास और भक्ति गीतों की गूंज ने जैसे संपूर्ण वातावरण को शिवमय बना दिया। स्थानीय व दूर-दराज से आए कवियों और कलाकारों ने ऐसी प्रस्तुति दी कि जनमानस मंत्रमुग्ध रह गया।
इस आयोजन ने केवल एक मंदिर के नवीनीकरण का उद्घोष नहीं किया, बल्कि क्षेत्रवासियों के दिलों को जोड़ने, सांस्कृतिक विरासत को पुनर्जीवित करने और जनकल्याण के संकल्प को सशक्त करने का कार्य किया।
पूरे कार्यक्रम को सफल बनाने में शुभम ओझा शोधार्थी दिल्ली विश्वविद्यालय, अधिवक्ता वैभव पांडे, कार्तिकेय शुक्ला(क्रिकेटर),रविन्द्र दुबे पत्रकार, अधिवक्ता पुष्पेश पांडे, अधिवक्ता सौरभ तिवारी, पत्रकार अजय पांडे सभी का सराहनीय योगदान रहा।
यह शिव मंदिर अब केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि जनसमर्पण, संस्कृति और विकास की प्रेरणास्रोत बन चुका है।
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