सफलता कि कहानि ,प्रोजेक्ट समर्थ ने बदली जिंदगी: बधिर समाज के सशक्त प्रहरी बने मनीष पवार, आत्मनिर्भरता और सेवा की मिसाल
संवाददाता सायरा सूर्यवंशी एनसीआर नोएडा
गाजियाबाद।दिनांक: 27.07.2026जन्म से श्रवण बाधित होने के बावजूद जीवन की कठिन परिस्थितियों को अपनी कमजोरी नहीं, बल्कि ताकत बनाने वाले जनपद गाजियाबाद के निवासी श्री मनीष पवार आज बधिर एवं दिव्यांग समाज के लिए प्रेरणा, संघर्ष और आत्मनिर्भरता का सशक्त उदाहरण बन चुके हैं। उन्होंने न केवल स्वयं को आत्मनिर्भर बनाया, बल्कि हजारों बधिर एवं दिव्यांग व्यक्तियों को उनके अधिकार दिलाने, सरकारी योजनाओं से जोड़ने तथा सम्मानजनक जीवन जीने के लिए प्रेरित करने का कार्य भी किया है।श्री मनीष पवार की पत्नी भी श्रवण एवं वाणी बाधित हैं। दोनों ने संचार संबंधी कठिनाइयों, सामाजिक उपेक्षा और अनेक चुनौतियों का सामना करते हुए यह साबित किया है कि यदि अवसर, सहयोग और दृढ़ इच्छाशक्ति हो तो दिव्यांगता कभी भी सफलता के मार्ग में बाधा नहीं बन सकती।बधिर व्यक्तियों को सामान्य जीवन में अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। सरकारी कार्यालयों, अस्पतालों, बैंकों, विद्यालयों एवं अन्य सार्वजनिक संस्थानों में सांकेतिक भाषा जानने वाले व्यक्तियों की कमी के कारण उन्हें अपनी बात समझाने और आवश्यक जानकारी प्राप्त करने में परेशानी होती है। शिक्षा, रोजगार, सरकारी योजनाओं एवं सामाजिक सहभागिता तक समान पहुंच का अभाव भी उनके सामने बड़ी चुनौती है।इन्हीं चुनौतियों को समझते हुए श्री मनीष पवार वर्षों से बधिर समाज के उत्थान के लिए निरंतर कार्य कर रहे हैं। वे नेशनल एसोसिएशन ऑफ द डेफ, नई दिल्ली के सदस्य, अखिल भारतीय बधिर संघ, नई दिल्ली के कार्यकारिणी सदस्य तथा उत्तर प्रदेश बधिर फेडरेशन, लखनऊ सहित विभिन्न सामाजिक संगठनों से जुड़े रहे हैं। उनके प्रयासों से अनेक दिव्यांगजन यूडीआईडी (UDID) कार्ड, दिव्यांग पेंशन, छात्रवृत्ति, ड्राइविंग लाइसेंस, शिक्षा एवं अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ प्राप्त कर चुके हैं।वर्तमान में श्री मनीष पवार नींव शक्ति संस्था के सहयोग से संचालित “प्रोजेक्ट समर्थ – सामर्थ्य ही पहचान” के अंतर्गत बधिर एवं दिव्यांग व्यक्तियों की शिक्षा, कौशल विकास, रोजगार, स्वरोजगार, सामाजिक जागरूकता और सशक्तिकरण के लिए सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं। वे दिव्यांगजनों को सरकारी योजनाओं की जानकारी देने, आवश्यक दस्तावेज तैयार कराने, रोजगार के अवसरों से जोड़ने तथा आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित करते हैं।खेलों के क्षेत्र में भी उनका उल्लेखनीय योगदान है। वे स्वयं एक क्रिकेट खिलाड़ी हैं तथा बधिर खिलाड़ियों को खेलों में आगे बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयासरत रहते हैं। डेफ एसोसिएशन ऑफ उत्तर प्रदेश एवं ऑल इंडिया स्पोर्ट्स काउंसिल ऑफ द डेफ के माध्यम से वे खिलाड़ियों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में भागीदारी के अवसर उपलब्ध कराने में सहयोग करते हैं। उनका मानना है कि खेल केवल शारीरिक विकास का माध्यम नहीं, बल्कि आत्मविश्वास, अनुशासन और नेतृत्व क्षमता विकसित करने का भी सशक्त साधन है।
श्री मनीष पवार वर्तमान में जिला प्रशासन गाजियाबाद के अपर जिलाधिकारी (नगर) कार्यालय में डाक डिस्पैचर के पद पर कार्यरत हैं। सरकारी सेवा में रहते हुए भी वे समाज सेवा के लिए समय निकालते हैं तथा बधिर समाज की समस्याओं को प्रशासन तक पहुंचाने और उनके समाधान के लिए सतत प्रयास करते हैं।
लाभार्थी का बयान,श्री मनीष पवार ने बताया कि “प्रोजेक्ट समर्थ मेरे लिए केवल एक योजना नहीं, बल्कि समाज में बदलाव लाने का माध्यम है। इस पहल के माध्यम से मुझे दिव्यांग साथियों तक पहुंचने, उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने और आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित करने का अवसर मिला है। मेरा विश्वास है कि यदि समाज और प्रशासन का सहयोग मिलता रहे तो प्रत्येक दिव्यांग व्यक्ति सम्मानपूर्वक जीवन जी सकता है। मेरी कोशिश है कि कोई भी बधिर या दिव्यांग व्यक्ति जानकारी के अभाव में अपने अधिकारों और सुविधाओं से वंचित न रहे।” उन्होंने कहा कि “मैं स्वयं श्रवण बाधित हूं, इसलिए दिव्यांगजनों की समस्याओं को बहुत करीब से समझता हूं। आज मेरा उद्देश्य है कि अधिक से अधिक दिव्यांगजन शिक्षा, कौशल, रोजगार और सरकारी योजनाओं से जुड़कर आत्मनिर्भर बनें तथा समाज की मुख्यधारा में सम्मान के साथ अपनी पहचान स्थापित करें।”प्रेरणा की मिसाल,श्री मनीष पवार की जीवन यात्रा इस बात का प्रमाण है कि दृढ़ इच्छाशक्ति, आत्मविश्वास और समाज के प्रति समर्पण के साथ किसी भी चुनौती को अवसर में बदला जा सकता है। प्रोजेक्ट समर्थ के माध्यम से वे आज बधिर एवं दिव्यांग समाज को जागरूक, शिक्षित, संगठित और आत्मनिर्भर बनाने के मिशन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उनकी सफलता की कहानी न केवल दिव्यांग समाज, बल्कि पूरे समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत है।












