स्वदेशी’ और ‘ग्राम स्वराज’ के गांधीवादी विचारों को प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के ‘आत्मनिर्भर भारत’ एवं ‘विकसित भारत@2047’ के संकल्प से जोड़ते हुए केवीआईसी ने मशीनरी एवं टूलकिट वितरण कार्यक्रम आयोजित किया।

स्वदेशी’ और ‘ग्राम स्वराज’ के गांधीवादी विचारों को प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के ‘आत्मनिर्भर भारत’ एवं ‘विकसित भारत@2047’ के संकल्प से जोड़ते हुए केवीआईसी ने मशीनरी एवं टूलकिट वितरण कार्यक्रम आयोजित किया।

पवन सूर्यवंशी ब्यूरो चीफ ऑल एनसीआर

दिनांक 28 अप्रैल 2026मंडलीय कार्यालय मेरठ के अंतर्गत आयोजित कार्यक्रम में लगभग 500 लाभार्थियों को विभिन्न ग्रामोद्योग गतिविधियों हेतु 896 मशीनरी एवं टूलकिट वितरित किया गया। पिछले पाँच वर्षों में मेरठ क्षेत्र में ग्रामोद्योग विकास योजना के अंतर्गत 1920 लाभार्थियों को 5132 मशीनरी एवं टूलकिट वितरित किया गया। पीएमईजीपी के अंतर्गत पाँच वर्षों में 2347 इकाइयों की स्थापना, 100 करोड़ रुपये से अधिक की मार्जिन मनी सहायता तथा 28,558 से अधिक रोजगार सृजित हुए।खादी क्षेत्र में मेरठ मंडल में 232 खादी संस्थाओं के माध्यम से 58,430 कारीगरों को रोजगार, तथा पाँच वर्षों में 1771 करोड़ रुपये से अधिक उत्पादन और 3135 करोड़ रुपये से अधिक बिक्री दर्ज। अध्यक्ष, केवीआईसी श्री मनोज कुमार ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत’ संकल्प से ‘हर घर स्वदेशी, घर-घर स्वदेशी’ की भावना खादी एवं ग्रामोद्योग के माध्यम से व्यापक जन-आंदोलन का स्वरूप ले रही है। गाजियाबाद। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के ‘आत्मनिर्भर भारत’, ‘वोकल फॉर लोकल’ एवं ‘लोकल टू ग्लोबल’ के संकल्प को सशक्त आधार प्रदान करते हुए खादी और ग्रामोद्योग आयोग (केवीआईसी) द्वारा मंडलीय कार्यालय मेरठ के अंतर्गत गाजियाबाद स्थित पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में मंगलवार को ग्रामोद्योग विकास योजना के तहत मशीनरी एवं टूलकिट वितरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि केवीआईसी अध्यक्ष श्री मनोज कुमार ने विभिन्न ग्रामोद्योग गतिविधियों से जुड़े लगभग 500 लाभार्थियों को 896 आधुनिक मशीनरी एवं टूलकिट प्रदान किए गए, जिससे कौशल विकास और उद्यमिता को और अधिक सुदृढ़ बनाया जा सके।अध्यक्ष, केवीआईसी श्री मनोज कुमार ने इस अवसर पर कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी का ‘विकसित भारत’ विजन, महात्मा गांधी के ‘स्वदेशी’ और ‘ग्राम स्वराज’ का आधुनिक स्वरूप है। उन्होंने कहा कि खादी और ग्रामोद्योग आज केवल परंपरा नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने का प्रभावी माध्यम बन चुके हैं। ‘हर घर स्वदेशी’ का भाव अब जन-आंदोलन का रूप ले रहा है।उन्होंने बताया कि ग्रामोद्योग विकास योजना के अंतर्गत विभिन्न ग्रामोद्योग गतिविधियों से जुड़े लाभार्थियों को हनी मिशन के तहत 600 मधुमक्खी बॉक्स, 200 विद्युत चालित कुम्हार चाक, 20 फुटवियर निर्माण एवं मरम्मत टूलकिट, 20 पेपर दोना-पत्तल बनाने की मशीन, 20 प्लंबर टूलकिट, 16 कच्ची घानी तेल मशीन, 80 मसाला एवं खाद्य प्रसंस्करण इकाइयाँ तथा 20 पॉपकॉर्न मशीन सहित अन्य सेवा उद्योगों से संबंधित उपकरण वितरित किए जा रहे हैं, जिससे कारीगरों को आधुनिक तकनीक से जोड़ते हुए उनके कौशल को स्वरोजगार एवं स्थायी आय के अवसरों में परिवर्तित किया जा सके।मंडलीय कार्यालय मेरठ की उपलब्धियां गिनाते हुए अध्यक्ष केवीआईसी ने कहा कि ग्रामोद्योग विकास योजना के अंतर्गत पिछले पाँच वर्षों (2020-21 से 2024-25) में 1920 लाभार्थियों को 5132 मशीनरी एवं टूलकिट वितरित किए गए हैं, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के अवसरों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP) के अंतर्गत भी मेरठ क्षेत्र के अंतर्गत महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज की गई है। पिछले पाँच वर्षों में 2347 इकाइयों की स्थापना की गई, जिनके लिए 100 करोड़ रुपये से अधिक की मार्जिन मनी सहायता प्रदान की गई तथा 28 हजार से अधिक लोगों को रोजगार प्राप्त हुआ। यह उपलब्धि ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा देने की दिशा में एक सशक्त कदम है। खादी क्षेत्र में भी मेरठ क्षेत्र निरंतर प्रगति कर रहा है। वर्तमान में 232 खादी संस्थाओं के माध्यम से 58,430 कारीगर जुड़े हुए हैं। पिछले पाँच वर्षों (2020-21 से 2024-25) के दौरान इस क्षेत्र में खादी का कुल उत्पादन 1,771 करोड़ रुपये से अधिक तथा कुल बिक्री 3,135 करोड़ रुपये से अधिक दर्ज की गई है। ये आंकड़े दर्शाते हैं कि खादी अब ‘खादी फॉर नेशन’, ‘खादी फॉर फैशन’ और ‘खादी फॉर ट्रांसफॉर्मेशन’ के रूप में देश की आत्मनिर्भरता का एक सशक्त आधार बन चुकी है। कार्यक्रम में खादी संस्थाओं के प्रतिनिधि, कारीगर, प्रशिक्षार्थी, बैंक प्रतिनिधि तथा केवीआईसी एवं राज्य सरकार के अधिकारी उपस्थित रहे। यह आयोजन ‘आत्मनिर्भर भारत’ के निर्माण की दिशा में केवीआईसी के सतत प्रयासों का सशक्त उदाहरण है।

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