चिन्मय विद्यालय में चिन्मय अमृत महोत्सव के तहत विशेष सत्र आयोजित

चिन्मय विद्यालय में चिन्मय अमृत महोत्सव के तहत विशेष सत्र आयोजित

रायबरेली/ऊँचाहार। चिन्मय मिशन के 75 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में मनाए जा रहे “चिन्मय अमृत महोत्सव” के अंतर्गत चिन्मय विद्यालय, एनटीपीसी ऊँचाहार में विद्यार्थियों, शिक्षकों, एनसीसी कैडेट्स एवं अभिभावकों के लिए विशेष प्रेरणादायी सत्रों का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम में चिन्मय मिशन, दिल्ली से पधारे स्वामी प्रकर्षानंद जी ने अलग-अलग आयु वर्ग और समूहों के लिए जीवन-मूल्यों, अनुशासन, नेतृत्व, नैतिकता, कर्तव्यबोध और जिम्मेदारी जैसे विषयों पर मार्गदर्शन दिया।

विद्यालय की छात्र परिषद के साथ आयोजित सत्र में “जिम्मेदार नेतृत्व” विषय पर स्वामी जी ने कहा कि सच्चा नेतृत्व केवल दूसरों का मार्गदर्शन करना नहीं, बल्कि स्वयं अनुशासन, जिम्मेदारी और आदर्श आचरण का उदाहरण प्रस्तुत करना है।

कक्षा III से V के विद्यार्थियों के लिए “अनुशासन का महत्व” विषय पर सत्र आयोजित हुआ। वहीं कक्षा VI से VIII के विद्यार्थियों को “किशोरावस्था की चुनौतियों” से जुड़े शारीरिक, मानसिक एवं भावनात्मक बदलावों के प्रति जागरूक करते हुए आत्म-संयम, सकारात्मक सोच और सही निर्णय लेने के महत्व को समझाया गया।

एनसीसी कैडेट्स के लिए “अर्जुन से नेतृत्व के गुणों की सीख” विषय पर भगवद्गीता के प्रसंगों के माध्यम से एकाग्रता, साहस, कर्तव्यनिष्ठा एवं निर्णय क्षमता पर प्रकाश डाला गया।

कक्षा IX एवं X के विद्यार्थियों के लिए “कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का नैतिक उपयोग” विषय पर विशेष सत्र हुआ। स्वामी जी ने विद्यार्थियों से तकनीक और AI का उपयोग ज्ञान एवं विकास के साधन के रूप में करने तथा इसके प्रयोग में नैतिकता, विवेक और जिम्मेदारी बनाए रखने का आह्वान किया।

कक्षा XI एवं XII के विद्यार्थियों के लिए “अपने जीवन के उद्देश्य की खोज : आंतरिक शक्ति, जीवन-मूल्य एवं जिम्मेदार नेतृत्व” विषय पर मार्गदर्शन दिया गया। उन्होंने विद्यार्थियों को अपनी क्षमताओं को पहचानने, जीवन का उद्देश्य निर्धारित करने और मूल्यों पर आधारित निर्णय लेने के लिए प्रेरित किया।

शिक्षकों के लिए आयोजित सत्र में स्वामी प्रकर्षानंद जी ने भगवद्गीता एवं जीवनोपयोगी उदाहरणों के माध्यम से कर्तव्यनिष्ठा और आदर्श आचरण पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि शिक्षक का आचरण विद्यार्थियों के चरित्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

अभिभावकों के लिए आयोजित सत्र में पारिवारिक धर्म, दायित्व एवं मूल्यों पर चर्चा करते हुए परिवार में परस्पर सम्मान, संवाद, सामंजस्य और संस्कारों के महत्व को रेखांकित किया गया।

कार्यक्रम की विशेषता रही कि विद्यार्थियों की आयु और आवश्यकताओं के अनुरूप अलग-अलग विषयों का चयन किया गया। अनुशासन, किशोरावस्था, नेतृत्व, भगवद्गीता, AI के नैतिक उपयोग और जीवन के उद्देश्य जैसे विषयों पर दिए गए मार्गदर्शन को विद्यार्थियों, शिक्षकों और अभिभावकों ने उपयोगी एवं प्रेरणादायी बताया।

विद्यालय के प्रधानाचार्य श्री मनीष कुमार स्वामी ने कार्यक्रम की सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए स्वामी प्रकर्षानंद जी के प्रति आभार जताया। उन्होंने कहा कि ऐसे मूल्यपरक एवं जीवनोपयोगी कार्यक्रम शिक्षा के साथ विद्यार्थियों में संस्कार, चरित्र और जिम्मेदारी की भावना को मजबूत करते हैं।

कार्यक्रम में विद्यालय के शिक्षकगण, विद्यार्थी, एनसीसी कैडेट्स एवं बड़ी संख्या में अभिभावक उपस्थित रहे। सभी ने स्वामी प्रकर्षानंद जी के विचारों से प्रेरणा लेते हुए जीवन को अधिक अनुशासित, उद्देश्यपूर्ण एवं जिम्मेदार बनाने का संकल्प लिया।

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