दिनांक: 21 जनवरी 2026 एशियन वाटरबर्ड सेंसस-26 पहली गणना में ही अव्वल रहा पटना पक्षी विहार
संवाददाता योगेन्द्र सिंह
पहली गणना में पटना पक्षी विहार में 4,705 जलीय पक्षी दर्ज
जलीय पक्षियों की 56 प्रजातियां रिकॉर्ड
27 प्रवासी व 29 आवासीय प्रजातियां चिन्हित
सर्वाधिक संख्या में नॉर्दन पिनटेल (1270)
9 संकटग्रस्त प्रजातियों की उपस्थिति दर्ज
एटा जनपद स्थित पटना पक्षी विहार में एशियन वाटरबर्ड सेंसस-26 के अंतर्गत जलीय पक्षियों की पहली गणना सफलतापूर्वक सम्पन्न हुई। यह गणना वेटलैंड्स इंटरनेशनल के वैश्विक कार्यक्रम के तहत बायोडायवर्सिटी रिसर्च एंड डेवलपमेंट सोसाइटी (BRDS) एवं नेशनल चंबल सैंक्चुरी प्रोजेक्ट के संयुक्त तत्वावधान में की गई।
वेटलैंड्स इंटरनेशनल उत्तर प्रदेश के कोऑर्डिनेटर नीरज श्रीवास्तव के निर्देशन में, BRDS के पक्षी विशेषज्ञ डॉ. के.पी. सिंह के नेतृत्व में यह गणना कराई गई। इस दौरान अनुज यादव, अब्दुल कलाम, वन दरोगा शैलेन्द्र पाल, श्वेता पाल तथा वन रक्षक दीपशिखा व ममताज कुमार सहित अन्य कर्मी उपस्थित रहे।
56 प्रजातियां रिकॉर्ड, प्रवासी पक्षियों की उल्लेखनीय भागीदारी
गणना के दौरान जलीय पक्षियों की कुल 56 प्रजातियां चिन्हित की गईं, जिनमें 27 प्रवासी एवं 29 आवासीय (स्थानीय) प्रजातियां शामिल हैं। यह विविधता पटना पक्षी विहार की जैव-समृद्धि को दर्शाती है।
9 संकटग्रस्त प्रजातियों की उपस्थिति
गणना में निम्न 9 संकटग्रस्त प्रजातियां रिकॉर्ड की गईं—
सारस क्रेन, ओपन-बिल स्टॉर्क, पेंटेड स्टॉर्क, ब्लैक-हेडेड आइबिस, कॉमन पोचार्ड, ब्लैक-नेक्ड स्टॉर्क, ओरिएंटल डार्टर, फेरुजिनस डक तथा ग्रेटर स्पॉटेड ईगल।
प्रमुख प्रजातियों की संख्या
नॉर्दन पिनटेल – 1270
कॉमन टील – 458
नॉर्दन शोवलर – 432
गेडवाल – 369
कॉमन कूट – 295
बार-हेडेड गूज – 120
ग्रे-लैग गूज – 60
ग्रेटर कॉर्मोरेंट – 87
कॉम्ब डक – 75
यूरेशियन विजन – 20
साथ ही कॉमन पोचार्ड, रेड-क्रेस्टेड पोचार्ड, गार्गेनी आदि भी रिकॉर्ड किए गए।
प्रवासी पक्षियों के लिए महत्वपूर्ण स्टॉप-ओवर
डॉ. के.पी. सिंह ने बताया कि भारतीय उपमहाद्वीप में प्रवासी पक्षियों का आवागमन सेंट्रल एशियन फ्लाई-वे के माध्यम से होता है। पटना पक्षी विहार इस फ्लाई-वे का एक महत्वपूर्ण स्टॉप-ओवर वेटलैंड है, जहां प्रजातीय विविधता एवं संख्या का अधिक होना वेटलैंड के स्वास्थ्य के लिए सकारात्मक संकेत है।
गणना के परिणाम उत्साहजनक
नेशनल चंबल सैंक्चुरी प्रोजेक्ट की डीएफओ चांदनी सिंह ने कहा कि पटना पक्षी विहार में प्रभावी प्रबंधन एवं संरक्षण कार्य किए जा रहे हैं, जिसका प्रत्यक्ष परिणाम इस गणना में सामने आया है।
अतिरिक्त निगरानी व संरक्षण
रेंज ऑफिसर मनीषा कुकरेती ने बताया कि प्रवासी पक्षियों के सुरक्षित आवास हेतु जल-स्तर प्रबंधन के साथ-साथ निगरानी व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ किया गया है।












