तालाब को मिट्टी से पाटकर कब्जे की कोशिश, प्रधानपति पर गंभीर आरोप — ग्रामीणों ने प्रशासन से की शिकायत
संवाददाता अमित तिवारी प्रतापगढ़ (नवाबगंज): जिले के मनिकपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम परियांवा में एक सरकारी तालाब को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि गांव के प्रधानपति अनिल कुमार, पिता दलबहादुर मौर्य द्वारा सार्वजनिक तालाब में अवैध रूप से लगभग 200 ट्रॉली मिट्टी डलवाकर उसकी मूल संरचना को नष्ट कर दिया गया है। यह तालाब खाता संख्या 670, रकबा 0.90 हेक्टेयर में दर्ज है और सरकारी अभिलेखों में सार्वजनिक उपयोग हेतु चिन्हित है।
ग्रामीणों के अनुसार यह तालाब न केवल परियांवा, बल्कि ग्राम गौरी और छिनौर के वर्षा जल और अपशिष्ट जल के बहाव का प्रमुख स्रोत है। यह तालाब वर्ष भर गांव की सिंचाई व्यवस्था, जल संचयन और पारंपरिक उपयोग का अहम हिस्सा रहा है।
मिट्टी डालने से रुका प्राकृतिक बहाव
ग्रामीणों ने बताया कि तालाब में मिट्टी भर दिए जाने से गांव का पानी रुक गया है, जिससे खेतों में जलभराव, गंदगी और बीमारियों की आशंका बढ़ गई है। आने वाले समय में यह जलजमाव गांव में डेंगू, मलेरिया जैसी बीमारियों को भी जन्म दे सकता है।
प्लाटिंग की साजिश का आरोप
ग्रामीणों ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि इस मिट्टी भराव का उद्देश्य तालाब की भूमि पर अवैध कब्जा करके प्लाटिंग करना है। यह न सिर्फ सरकार की संपत्ति पर अतिक्रमण है, बल्कि सार्वजनिक हितों के खिलाफ भी एक गंभीर अपराध है।

शिकायत देकर की गई कार्रवाई की मांग
ग्रामीणों ने इस पूरे मामले की लिखित शिकायत उच्चाधिकारियों को सौंपते हुए तत्काल जांच कराने, मिट्टी हटवाने, तथा दोषियों पर विधिक कार्यवाही की मांग की है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि समय रहते प्रशासन ने इस पर ध्यान नहीं दिया, तो यह एक खतरनाक उदाहरण बन जाएगा, जहां सार्वजनिक संसाधनों को निजी लाभ के लिए नष्ट कर दिया जाएगा।
प्रशासन की चुप्पी सवालों के घेरे में
स्थानीय लोगों का कहना है कि घटना की सूचना संबंधित विभागों को दी जा चुकी है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। इससे लोगों में गहरा आक्रोश है और यदि जल्द उचित कदम नहीं उठाए गए तो वे सड़क पर उतरने को मजबूर होंगे।
ग्रामीणों की अपील
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि
- तत्काल तालाब की स्थिति का स्थलीय निरीक्षण किया जाए
- अवैध मिट्टी हटाई जाए
- जिम्मेदारों पर एफआईआर दर्ज हो
- तालाब की पूर्व स्थिति बहाल की जाए
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