बेमेतरा जिले में धड़ल्ले से चल रहे अवैध ईंट भट्टे, खनिज विभाग मौन
संवाददाता ताम्रध्वज साहू
छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले में अवैध ईंट भट्टों का कारोबार लगातार फल-फूल रहा है, लेकिन हैरानी की बात यह है कि इस पूरे मामले में खनिज विभाग की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है। जिले के ग्रामीण इलाकों में बड़ी संख्या में ऐसे भट्टे संचालित हो रहे हैं, जिनके पास न तो वैध अनुमति है और न ही पर्यावरणीय नियमों का पालन किया जा रहा है। इसके बावजूद प्रशासनिक कार्रवाई का अभाव स्थानीय लोगों के बीच असंतोष का कारण बनता जा रहा है।स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि इन अवैध ईंट भट्टों के संचालन से न केवल सरकारी राजस्व को भारी नुकसान हो रहा है, बल्कि पर्यावरण पर भी गंभीर असर पड़ रहा है। खेतों की उपजाऊ मिट्टी को बड़े पैमाने पर खोदकर ईंट बनाने में उपयोग किया जा रहा है, जिससे कृषि भूमि की गुणवत्ता लगातार गिरती जा रही है। कई किसानों ने शिकायत की है कि उनकी जमीन की ऊपरी परत हटा दी गई है, जिससे भविष्य में खेती करना मुश्किल हो जाएगा। इसके अलावा, भट्टों से निकलने वाला धुआं आसपास के गांवों में रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य के लिए खतरा बन चुका है। बच्चों और बुजुर्गों में सांस से संबंधित बीमारियों के मामले बढ़ते जा रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद प्रशासन ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया। सूत्रों के अनुसार, इन अवैध ईंट भट्टों के संचालन के पीछे एक संगठित नेटवर्क काम कर रहा है, जिसमें कुछ प्रभावशाली लोग शामिल हैं। यही वजह है कि नियमों की खुलेआम अनदेखी के बावजूद कार्रवाई नहीं हो पा रही है। कई भट्टे बिना किसी पंजीकरण के चल रहे हैं और रात के अंधेरे में मिट्टी की खुदाई की जाती है, ताकि प्रशासन की नजर से बचा जा सके। खनिज विभाग की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों से जब इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने मामले की जानकारी होने से इनकार कर दिया या जांच की बात कहकर पल्ला झाड़ लिया। हालांकि, स्थानीय लोगों का कहना है कि विभाग को इस अवैध गतिविधि की पूरी जानकारी है, लेकिन जानबूझकर अनदेखी की जा रही है। पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि अगर समय रहते इस पर रोक नहीं लगाई गई, तो इसके दीर्घकालिक दुष्परिणाम सामने आएंगे। मिट्टी का अत्यधिक दोहन, वायु प्रदूषण और जल स्रोतों पर दबाव जैसी समस्याएं भविष्य में और गंभीर रूप ले सकती हैं। उन्होंने प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग की है। इस पूरे मामले में सबसे चिंताजनक बात यह है कि कानून का खुलेआम उल्लंघन हो रहा है और जिम्मेदार विभाग मौन साधे हुए है। यदि जल्द ही प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो यह समस्या और विकराल हो सकती है। स्थानीय लोग अब इस मुद्दे को लेकर आंदोलन की तैयारी कर रहे हैं, ताकि प्रशासन को जगाया जा सके। अब देखना यह होगा कि बेमेतरा जिला प्रशासन और खनिज विभाग इस गंभीर मामले को कितनी गंभीरता से लेते हैं और अवैध ईंट भट्टों पर कब तक कार्रवाई होती है। फिलहाल, यह मामला शासन-प्रशासन की कार्यप्रणाली पर एक बड़ा सवालिया निशान बनकर खड़ा है।











