बेमेतरा में अवैध नल कनेक्शनों का अंबार, नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
जिला संवाददाता ताम्रध्वज साहू
बेमेतरा। शहर में इन दिनों अवैध नल कनेक्शनों का मुद्दा तेजी से तूल पकड़ता जा रहा है। नगर पालिका क्षेत्र के विभिन्न वार्डों में बड़ी संख्या में बिना अनुमति लिए पानी के कनेक्शन लगाए जाने की शिकायतें सामने आई हैं। इस स्थिति ने न केवल जल आपूर्ति व्यवस्था को प्रभावित किया है, बल्कि प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि नगर पालिका की लापरवाही के चलते अवैध कनेक्शनों का जाल लगातार फैलता जा रहा है। कई इलाकों में तो स्थिति यह है कि अधिकृत कनेक्शनधारियों को पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा, जबकि अवैध कनेक्शन के जरिए पानी का दुरुपयोग किया जा रहा है। इससे जल संकट और गहराता जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, शहर के नयापारा, पुराना बस स्टैंड, वार्ड क्रमांक 15 और 16 सहित कई क्षेत्रों में बड़ी संख्या में ऐसे कनेक्शन हैं, जिनका कोई आधिकारिक रिकॉर्ड नगर पालिका के पास मौजूद नहीं है। यह भी आरोप लगाए जा रहे हैं कि कुछ मामलों में नगर पालिका के कर्मचारियों की मिलीभगत से अवैध कनेक्शन दिए जा रहे हैं।स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्होंने कई बार इस मुद्दे की शिकायत नगर पालिका में की, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि अधिकारी केवल आश्वासन देते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति जस की तस बनी हुई है। इस पूरे मामले में नगर पालिका के मुख्य नगर पालिका अधिकारी (CMO) Naresh Verma से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उनका फोन रिसीव नहीं हुआ। बार-बार कॉल करने के बावजूद जवाब नहीं मिलने से प्रशासन की पारदर्शिता पर भी सवाल उठ रहे हैं। नागरिकों का कहना है कि जब जिम्मेदार अधिकारी ही संवाद के लिए उपलब्ध नहीं होंगे, तो समस्याओं का समाधान कैसे होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि अवैध नल कनेक्शन केवल जल संसाधनों की बर्बादी नहीं है, बल्कि यह राजस्व की भी बड़ी हानि है। नगर पालिका को हर महीने लाखों रुपये का नुकसान हो रहा है, जो शहर के विकास कार्यों में उपयोग किया जा सकता था। इसके अलावा, पाइपलाइन पर अतिरिक्त दबाव पड़ने से तकनीकी खराबियां भी बढ़ रही हैं, जिससे पूरी जल आपूर्ति व्यवस्था प्रभावित हो रही है। शहर के जागरूक नागरिकों ने इस मुद्दे पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि नगर पालिका को सर्वे कराकर सभी अवैध कनेक्शनों की पहचान करनी चाहिए और उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए। साथ ही, जिन कर्मचारियों की मिलीभगत सामने आए, उनके खिलाफ भी अनुशासनात्मक कार्रवाई होनी चाहिए। वहीं, कुछ सामाजिक संगठनों ने भी इस मामले को लेकर प्रशासन को ज्ञापन सौंपने की तैयारी शुरू कर दी है। उनका कहना है कि यदि जल्द ही इस समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो वे आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे। जल संकट जैसे गंभीर मुद्दे के बीच अवैध कनेक्शनों का बढ़ना निश्चित रूप से चिंता का विषय है। यदि समय रहते इस पर नियंत्रण नहीं किया गया, तो आने वाले दिनों में स्थिति और भी भयावह हो सकती है। अब देखना यह होगा कि नगर पालिका प्रशासन इस गंभीर समस्या को कितनी गंभीरता से लेता है और क्या वाकई में कोई ठोस कदम उठाए जाते हैं या फिर यह मामला भी केवल फाइलों में ही दबकर रह जाएगा।












