कानपुर में 3200 करोड़ का महाघोटाला: गरीबों के खातों से खेला गया फर्जी ट्रांजेक्शन का खेल
स्टेट ब्यूरो चीफ विष्णु रावत 

कानपुर में एक चौंकाने वाला आर्थिक फर्जीवाड़ा सामने आया है, जहां पेंटर, कबाड़ी और मजदूर जैसे गरीब लोगों के बैंक खातों के जरिए करीब 3200 करोड़ रुपए का लेनदेन किया गया। इस मामले में पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है, जबकि मुख्य आरोपी को हिरासत में लेकर पूछताछ जारी है।
गरीबों के नाम पर फर्जी कंपनियों का जाल
पुलिस जांच में खुलासा हुआ है कि इस पूरे नेटवर्क का मास्टरमाइंड महफूज आलम उर्फ पप्पू छुरी है, जो आर्थिक रूप से कमजोर और अनजान लोगों को झांसे में लेकर उनके नाम पर फर्जी फर्म और बैंक खाते खुलवाता था। इन खातों के जरिए करोड़ों रुपए का लेनदेन कर टैक्स चोरी और हवाला जैसे गैरकानूनी काम किए जा रहे थे। जाजमऊ की रहने वाली आरती, जो मजदूरी कर अपना गुजारा करती हैं, उनके नाम पर “आरती इंटरप्राइजेज” बनाकर करीब 100 करोड़ रुपए का ट्रांजेक्शन किया गया। इसी तरह अन्य लोगों—शहनवाज, काशिफ और अल्फिशा—के नाम पर भी फर्जी फर्म बनाकर करोड़ों रुपए घुमाए गए।
पेंटर और कबाड़ी भी बने शिकार
कबाड़ी का काम करने वाले अजय शुक्ला और पेंटर निखिल कुमार जैसे लोगों के दस्तावेजों का दुरुपयोग कर उनके नाम पर फर्जी कंपनियां बनाई गईं। इनके खातों से भी करोड़ों का लेनदेन हुआ, जबकि उन्हें इसकी कोई जानकारी तक नहीं थी।
16 बैंकों और 100 से ज्यादा खातों का नेटवर्क
जांच में सामने आया है कि इस गिरोह ने 16 अलग-अलग बैंकों में 100 से ज्यादा खातों का इस्तेमाल कर 3200 करोड़ रुपए से अधिक का ट्रांजेक्शन किया। इस रकम को स्लॉटर हाउस, फर्जी GST इनवॉइस और ई-वे बिल के जरिए घुमाया गया, जिससे बड़े स्तर पर टैक्स चोरी की गई।
गिरफ्तारी और जांच तेज
पुलिस ने इस मामले में महफूज के साले महताब आलम और उसके बेटे मासूम को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। मुख्य आरोपी से लगातार पूछताछ की जा रही है और जल्द उसकी गिरफ्तारी की तैयारी है।
कई एजेंसियां जांच में जुटीं
इस बड़े फर्जीवाड़े में टेरर फंडिंग की आशंका को देखते हुए अब प्रवर्तन निदेशालय (ED), आयकर विभाग और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) भी जांच में शामिल हो गए हैं। पूरे नेटवर्क की परतें खोली जा रही हैं और आने वाले दिनों में और बड़े खुलासे होने की संभावना है। यह मामला न सिर्फ वित्तीय अपराध की गंभीरता को दिखाता है, बल्कि यह भी उजागर करता है कि किस तरह आम और गरीब लोगों को बड़े आर्थिक घोटालों में मोहरा बनाया जा रहा है।












